बिजनौर (Bijnor Special Report): मां-बाप का प्यार इस दुनिया में सबसे अनमोल माना जाता है, और जब बात अपनी संतान की जान बचाने की हो, तो एक पिता अपनी उम्र और ताकत को भूलकर किसी भी असंभव काम को संभव बना देता है। बिजनौर जिले से सामने आई यह घटना इस बात का सबसे बड़ा और जीवंत प्रमाण है। वन क्षेत्र के पास रहने वाले एक परिवार पर अचानक आए इस संकट ने साबित कर दिया कि एक पिता के हौसले के आगे खुद मौत (बाघ) को भी हार माननी पड़ गई।READ ALSO:-मेरठ में 'खाकी vs खाकी' का संग्राम! नशे में धुत अग्निवीर ने हाईवे पर काटा गदर, बीच सड़क फाड़ डाली दारोगा की वर्दी
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यह सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली घटना शनिवार सुबह करीब 8 बजे की है। दिन की शुरुआत आम दिनों की तरह ही हो रही थी, लेकिन कुछ ही पलों में यह सुबह एक भयानक खौफ और चमत्कारिक बहादुरी की कहानी में बदल गई।
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क्या था पूरा मामला? जंगल में कैसे हुआ हमला
\r\n\r\nप्राप्त विवरण के अनुसार, बिजनौर के सहानपुर (या सहसपुर) रेंज के अंतर्गत आने वाले मोथला उर्फ नीम वाली वन क्षेत्र में वन गुर्जर परिवार डेरा डालकर रहते हैं। इस इलाके में जंगली जानवरों का खतरा हमेशा बना रहता है।
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इसी डेरे पर रहने वाले 33 वर्षीय पशुपालक रफी (Rafi) शनिवार की सुबह अपनी गाय और भैंसों को चराने के लिए जंगल की तरफ निकले थे। मवेशी अपनी धुन में चर रहे थे और रफी आसपास ही मौजूद थे। तभी जंगल की घनी झाड़ियों में घात लगाकर बैठे एक खूंखार बाघ (Tiger) ने बिना कोई आहट दिए रफी पर अचानक जोरदार हमला बोल दिया।
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बाघ के इस अचानक और आक्रामक हमले से रफी संभल नहीं पाए। बाघ ने अपने नुकीले पंजों और जबड़े से रफी को दबोच लिया। हमले में रफी के कंधे, हाथ और कमर पर गंभीर चोटें आईं और शरीर से खून बहने लगा। अपनी जान बचाने के लिए रफी जोर-जोर से चीखने और चिल्लाने लगे।
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फरिस्ता बनकर आया 65 साल का पिता, डंडे से शुरू की पिटाई
\r\n\r\nरफी की चीख-पुकार घटनास्थल से लगभग 250 मीटर की दूरी पर स्थित उनके डेरे तक पहुंच गई। जैसे ही रफी के 65 वर्षीय बुजुर्ग पिता गुलाम नबी (Ghulam Nabi) ने बेटे की चीख सुनी, उनका कलेजा कांप उठा।
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बिना एक पल गंवाए, बुजुर्ग गुलाम नबी ने हाथ में एक मजबूत डंडा उठाया और हवा की रफ्तार से उसी दिशा में दौड़ पड़े जहां से चीखें आ रही थीं। जब वे मौके पर पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके सामने खौफ का दूसरा नाम यानी एक विशाल बाघ उनके बेटे रफी को जबड़े में दबोचे हुए बैठा था।
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एक पल के लिए किसी भी आम इंसान का दिल दहल सकता था, लेकिन गुलाम नबी के भीतर का पिता जाग चुका था। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत बाघ पर डंडे बरसाने शुरू कर दिए।
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- \r\n बाघ का घुर्राना और पिता की जिद: गुलाम नबी लगातार डंडे से बाघ को पीट रहे थे, लेकिन बाघ अपनी पकड़ ढीली करने को तैयार नहीं था। बाघ ने कई बार भयानक आवाज में घुर्राकर (Growling) उस बुजुर्ग पिता को डराने और भगाने की कोशिश की, ताकि वे पीछे हट जाएं। लेकिन गुलाम नबी ने एक इंच भी पीछे कदम नहीं हटाया और पूरी ताकत से डंडे चलाते रहे।\r\n \r\n
- \r\n 5 मिनट का खौफनाक संघर्ष: पिता और बाघ के बीच यह जानलेवा संघर्ष लगभग 5 मिनट तक चलता रहा। एक तरफ खूंखार वन्यजीव की ताकत थी, तो दूसरी तरफ बेटे को बचाने का संकल्प लिए एक बूढ़े पिता का अदम्य साहस। आखिरकार, बुजुर्ग पिता के इस अटूट हौسले और लगातार प्रहारों के आगे बाघ को झुकना पड़ा। वह डरकर घनी झाड़ियों और जंगल की तरफ भाग खड़ा हुआ।\r\n \r\n
| \r\n घटना का संक्षिप्त विवरण (Quick Facts) \r\n | \r\n
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| \r\n पीड़ित बेटा: \r\n | \r\n
| \r\n बहादुर पिता: \r\n | \r\n
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सीएचसी में इलाज और घायल बेटे की जुबानी
\r\n\r\nबाघ के चंगुल से छूटने के बाद रफी बुरी तरह लहूलुहान हो चुके थे। उनके हाथ और कमर पर बाघ के पंजों के गहरे निशान थे। शरीर से लगातार खून बहता देख परिवार और आसपास के लोगों में कोहराम मच गया।
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घटना की तत्काल सूचना ग्राम प्रधान हरविंदर कौर के पति नरवेल सिंह को दी गई। सूचना मिलते ही नरवेल सिंह तुरंत मौके पर पहुंचे और अपनी मदद से घायल रफी को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया।
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अस्पताल में डॉक्टरों ने तुरंत रफी का प्राथमिक इलाज (First Aid) किया। गनीमत यह रही कि समय पर अस्पताल पहुंच जाने और प्राथमिक उपचार मिलने से उनकी स्थिति खतरे से बाहर हो गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें घर भेज दिया।
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अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से करा रहे घायल रफी ने मीडिया और स्थानीय लोगों को अपनी आपबीती बताते हुए कहा,
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\r\n\r\n\r\n"अगर उस वक्त मेरे अब्बा (पिता) समय पर डंडा लेकर नहीं पहुंचते और मुझसे दूर ही रहते, तो आज मेरी जान नहीं बच पाती। वे करीब 5 मिनट तक अकेले उस खूंखार बाघ से भिड़े रहे और तब तक डंडे बरसाते रहे जब तक वह जंगल की तरफ भाग नहीं गया। मेरे पिता ने ही मुझे नया जीवन दिया है।"\r\n
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वन विभाग की टीम मौके पर, ग्रामीणों को दी गई कड़ी चेतावनी
\r\n\r\nइस सनसनीखेज घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग (Forest Department) के अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया। क्षेत्रीय वन अधिकारी विकास कुमार (Vikas Kumar) और वन दरोगा मोहित कुमार (Mohit Kumar) अपनी टीम के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे।
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अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया और पीड़ित परिवार तथा आसपास के ग्रामीणों से बातचीत की। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों और वहां रहने वाले अन्य लोगों को कड़ी हिदायत दी कि वे जंगल के भीतर अकेले न जाएं और पूरी तरह सतर्क रहें।
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वन दरोगा मोहित कुमार का बयान:
\r\n\r\nइस पूरे मामले पर वन दरोगा मोहित कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि वन गुर्जर अक्सर जंगल के भीतर या उसके बेहद करीब डेरा डालकर रहते हैं। उन्होंने कहा, "हम लोगों ने इन्हें कई बार समझाया है कि इस तरह घने जंगल के बीच में डेरा डालकर रहना और पशुओं को चराना खतरनाक साबित हो सकता है। यहां सुरक्षा के लिहाज से पिंजड़ा (Cage) लगाना या हर वक्त पुलिस-प्रशासनिक निगरानी रखना असंभव है।" वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और जंगली इलाकों में जाने से बचें।
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पिता के प्यार और साहस की मिसाल
\r\n\r\nबिजनौर की यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि ममता और वात्सल्य की तरह ही एक पिता का साहस भी असीम होता है। 65 साल की उम्र में अपनी जान की परवा न करते हुए 5 मिनट तक बाघ से अकेले मुकाबला करना कोई आम बात नहीं है। गुलाम नबी ने अपनी बहादुरी से यह दिखा दिया कि संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, एक पिता अपने बच्चे की रक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हटता। इस घटना की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है और हर कोई बुजुर्ग पिता के जज्बे को सलाम कर रहा है।
Sabse pehle comment karne wale banein.