बिजनौर: केवल दस मीटर चौड़ी धारा वाली मालन नदी ने पिछले महीने अपना विकराल रूप दिखाकर दो दर्जन गांवों को अपनी आगोश में ले लिया था, जिससे मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे तक बंद करना पड़ा। लेकिन अब इस तबाही से भी बड़ा खतरा सामने आ रहा है। गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और अगर गंगा का 41 साल पुराना तटबंध टूटा तो खादर क्षेत्र में बड़ी तबाही मच सकती है।READ ALSO:-बिजनौर के रावली गंगा तटबंध पर चल रहा युद्ध स्तर पर काम, डीएम जसजीत कौर ने किया निरीक्षण
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जब मालन ने दिखाया विकराल रूप
\r\n\r\nछह अगस्त को मालन नदी पर बना तटबंध अचानक टूट गया, और इसका पानी रातोंरात दो दर्जन से ज्यादा गांवों में भर गया। खेतों से लेकर घरों तक में पानी घुस गया, जिससे ग्रामीण अपनी छतों पर रहने को मजबूर हो गए। मालन का पानी गांव मंडावली से बडकला तक सड़क पर पांच किलोमीटर तक फैल गया था। प्रशासन को केवल 100 मीटर के कटे हुए तटबंध को ठीक करने में 72 घंटे का समय लग गया, जिससे इस छोटे से कटाव की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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\r\n\r\nअब गंगा की बढ़ती धार से 'खतरा' बढ़ा
\r\n\r\nमालन की तबाही तो महज एक बानगी थी। अब गंगा का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है, जो एक बड़ी आपदा का संकेत है। इससे पहले भी वर्ष 2010 और 2013 में गंगा का पानी बिना तटबंध टूटे ही दर्जनों गांवों में भर गया था, जिससे मेरठ-पौड़ी हाईवे को बंद करना पड़ा था। उस समय गंगा का वेग इतना था कि कई बारहसिंघा तक बह गए थे, जो इस इलाके से कई वर्षों तक गायब रहे।
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41 साल पुराना तटबंध: अब सबसे बड़ी चुनौती
\r\n\r\nगंगा पर बना रावली तटबंध गांवों के लिए एक 'रक्षा कवच' की तरह काम करता रहा है। यह तटबंध 1984 में बना था और समय-समय पर इसकी मरम्मत होती रही है। वर्ष 2012 में भी गंगा ने तटबंध की ओर कटान किया था, लेकिन तब सिंचाई विभाग ने उसे रोक दिया था।
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इस बार स्थिति अलग है। गंगा की तेज धारा के कारण तटबंध पर बहुत तेजी से कटान हो रहा है। सिंचाई विभाग के सामने इसे रोकना एक बहुत बड़ी चुनौती है। अगर यह तटबंध टूटा, तो खादर क्षेत्र में एक ऐसी तबाही मचेगी जिसकी आशंका से ही ग्रामीण दहशत में हैं।
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Sabse pehle comment karne wale banein.