बिजनौर (Bijnor): आगामी चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में चुनाव आयोग ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। बिजनौर जनपद में चल रहे विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision - SIR) का शुक्रवार को समापन हो गया। इस अभियान के खत्म होने के साथ ही जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।READ ALSO:-मेरठ में 'वोट की चोट' से पहले बड़ा झटका: 6.68 लाख मतदाता ड्राफ्ट लिस्ट से होंगे बाहर; SIR अभियान खत्म, डाटा लॉक
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प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, Bijnor Voter List 2025 से करीब 4 लाख 27 हजार 349 मतदाताओं के नाम काटे जाने की पूरी संभावना है। यह संख्या जिले के कुल मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा है। प्रशासन ने इन नामों को संदिग्ध श्रेणियों (मृतक, शिफ्टेड, या अनुपस्थित) में चिह्नित किया है। 31 दिसंबर को जब ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होगी, तो इन नामों का उसमें शामिल होना मुश्किल है।
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Bijnor Voter List 2025: 84.45% काम पूरा, लाखों नाम अधर में

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बिजनौर जिले की आठों विधानसभा सीटों पर पिछले कई हफ्तों से बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सर्वे कर रहे थे। शुक्रवार को अभियान के अंतिम दिन तक 84.45 प्रतिशत गणना प्रपत्र (Enumeration Forms) ऑनलाइन अपलोड कर दिए गए हैं।
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जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, जनपद की नजीबाबाद, नगीना, बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर, बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर विधानसभा सीटों पर कुल 27 लाख 50 हजार 319 मतदाता पंजीकृत थे। इस विशाल डेटाबेस को खंगालने के बाद प्रशासन को वोटर लिस्ट में भारी विसंगतियां मिली हैं।
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क्यों कट रहे हैं 4.27 लाख नाम? (बड़ी वजहें)

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इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने के पीछे तीन मुख्य कारण सामने आए हैं, जिनका खुलासा सर्वे रिपोर्ट में हुआ है:
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    निवास स्थान बदला (Shifted Voters): सबसे बड़ी संख्या उन लोगों की है, जिन्होंने अपना घर बदल लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2,31,493 मतदाता ऐसे हैं जो अपने पुराने पते पर नहीं रहते। ये लोग या तो काम के सिलसिले में दूसरे शहरों में शिफ्ट हो गए हैं या उन्होंने अपना मकान बदल लिया है। चुनाव आयोग के नियमानुसार, ऐसे लोगों का नाम उस पते की सूची से हटाना अनिवार्य है।
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    लापता मतदाता (Absent Voters): दूसरी बड़ी श्रेणी उन लोगों की है जो तलाश करने के बावजूद नहीं मिले। करीब 80,481 मतदाता ऐसे पाए गए हैं, जिनका बीएलओ द्वारा सत्यापन करने पर कोई अता-पता नहीं चला। न तो वे पते पर मिले और न ही उनके परिवार का कोई सदस्य उनकी जानकारी दे पाया।
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    मृतक मतदाता (Deceased Voters): वोटर लिस्ट में अभी भी हजारों ऐसे लोगों के नाम शामिल थे, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। अभियान के दौरान 72,239 मृत मतदाताओं की पहचान की गई है। इनके नाम अब स्थायी रूप से सूची से हटा दिए जाएंगे।
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2980 बीएलओ की फौज ने किया सर्वे

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इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय ने पूरी ताकत झोंक दी थी। जनपद में कुल 2,980 बीएलओ (Booth Level Officers) की ड्यूटी लगाई गई थी। इन अधिकारियों ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्र भरवाए और उन्हें ऑनलाइन अपलोड करने का काम किया।
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अब तक जनपद में कुल 23 लाख 22 हजार 702 गणना प्रपत्र अपलोड किए जा चुके हैं। निकाय और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को भी प्रपत्रों की वापसी और सत्यापन के काम में लगाया गया था, ताकि डाटा में कोई गलती न रहे।
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अधिकारियों का क्या कहना है?

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उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं एडीएम (वित्त एवं राजस्व) वान्या सिंह ने अभियान की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने बताया, "जनपद की सभी विधानसभा सीटों पर 84.45 प्रतिशत गणना प्रपत्र अपलोड किए जा चुके हैं। हमारे सर्वे में 72,293 मतदाता मृत पाए गए और 2 लाख 23 हजार से अधिक मतदाता शिफ्टेड मिले हैं। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 31 दिसंबर को किया जाएगा।"
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अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि 31 दिसंबर के बाद दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) आमंत्रित की जाएंगी। यानी अगर किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से कट जाता है, तो उसे अपनी बात रखने का एक मौका जरूर मिलेगा।
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विधानसभा-वार मैपिंग: नहटौर में सबसे कम, बिजनौर में ज्यादा

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Bijnor Voter List 2025 के शुद्धिकरण अभियान में पुरानी सूचियों के साथ मैपिंग (Mapping) का काम भी किया गया। विधानसभावार आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें काफी अंतर देखने को मिला है।
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    बिजनौर विधानसभा: यहां सबसे ज्यादा मैपिंग हुई। कुल 83,380 मतदाताओं का डाटा मैप किया गया।
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    नहटौर विधानसभा: यहां संख्या सबसे कम रही। केवल 39,422 मतदाताओं की ही मैपिंग हो सकी।
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हालांकि, अगर प्रतिशत के हिसाब से देखें, तो नहटौर विधानसभा अव्वल रही। वहां मैपिंग का प्रतिशत 87.32% रहा, जबकि बिजनौर विधानसभा में यह 78.98% रहा। अन्य विधानसभा क्षेत्रों में यह आंकड़ा 83.88% से 86.21% के बीच रहा। मैपिंग से यह पता चलता है कि मतदाता उस क्षेत्र में कितने लंबे समय से निवास कर रहा है और उसका पुराना रिकॉर्ड क्या है।
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मतदाता सूची शुद्धिकरण का महत्व

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बिजनौर जैसे संवेदनशील जिले में वोटर लिस्ट का शुद्ध होना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। अक्सर देखा जाता है कि मृत या शिफ्टेड वोटरों के नाम पर फर्जी वोटिंग (Bogus Voting) की जाती है। 4.27 लाख नाम कटना यह संकेत देता है कि अब तक कितनी बड़ी संख्या में 'घोस्ट वोटर्स' (Ghost Voters) लिस्ट में मौजूद थे। इस सफाई अभियान के बाद आगामी चुनावों में वोटिंग प्रतिशत और परिणाम दोनों पर असर पड़ने की संभावना है।
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31 दिसंबर का दिन अहम

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बिजनौर के निवासियों के लिए 31 दिसंबर की तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दिन प्रशासन ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करेगा।
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    अगर आपने सर्वे के दौरान बीएलओ से संपर्क नहीं किया था, तो आपका नाम कट सकता है।
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    अगर आप किराएदार हैं और मकान बदल लिया है, तो अपना नाम नई जगह की सूची में चेक करें।
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    लिस्ट आने के बाद उसे ऑनलाइन या मतदान केंद्र पर जाकर जरूर चेक करें।
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अगर नाम कट जाए तो क्या करें?

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अगर 31 दिसंबर की लिस्ट में आपका नाम नहीं मिलता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग आपको एक और मौका देगा।
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    फॉर्म 6 (Form 6): नया नाम जुड़वाने के लिए।
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    आपत्ति दर्ज करें: अगर आपको लगता है कि आपका नाम गलत तरीके से काटा गया है, तो आप सबूतों के साथ आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
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    ऑनलाइन आवेदन: आप राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) पर जाकर भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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बिजनौर में विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) का समापन एक बड़े बदलाव का संकेत है। 4.27 लाख नामों का लिस्ट से हटना यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में चुनाव अधिक पारदर्शी हों। हालांकि, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि इस प्रक्रिया में कोई भी असली और पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रह जाए। जनता को भी जागरूक रहकर 31 दिसंबर को सूची की जांच करनी चाहिए।
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बिजनौर में विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) समाप्त हो गया है। इस दौरान 27.5 लाख मतदाताओं में से करीब 4.27 लाख संदिग्ध (मृतक, शिफ्टेड, अनुपस्थित) मतदाता मिले हैं, जिनके नाम वोटर लिस्ट से कटने की संभावना है। 84.45% गणना प्रपत्र ऑनलाइन अपलोड हो चुके हैं। प्रशासन 31 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करेगा, जिसके बाद आपत्तियां ली जाएंगी।
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