बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मंगलवार की सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना के साथ हुई। शहर के पॉश इलाके साकेत कॉलोनी में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब स्थानीय लोगों ने मोबाइल टॉवर पर एक व्यक्ति का शव लटकता हुआ देखा। यह दृश्य इतना भयावह था कि देखने वालों के पैरों तले जमीन खिसक गई। मृतक की पहचान उसी टॉवर पर काम करने वाले एक कर्मचारी के रूप में हुई है।READ ALSO:-बिजनौर: 'रिश्वत' के चंद नोटों ने बर्बाद की जिंदगी, एंटी करप्शन टीम ने लेखपाल को रंगे हाथों दबोचा; सदर तहसील में मची अफरातफरी
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सूचना मिलते ही शहर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और भारी मशक्कत के बाद शव को नीचे उतारा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शुरुआती जांच में बीमारी और मानसिक तनाव की बात सामने आ रही है, लेकिन पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।
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मंगलवार की सुबह और वो खौफनाक मंजर

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घटना बिजनौर शहर कोतवाली क्षेत्र की साकेत कॉलोनी की है, जो नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम के ठीक सामने स्थित है। मंगलवार सुबह जब लोग अपनी दिनचर्या शुरू कर रहे थे और कुछ लोग मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे, तभी उनकी नजर वहां लगे एक मोबाइल टॉवर पर पड़ी।
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टॉवर की ऊंचाई पर एक व्यक्ति का शव फांसी के फंदे पर झूल रहा था। हवा में लटकते शव को देखकर कॉलोनी में चीख-पुकार मच गई। देखते ही देखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस और डायल 112 को दी।
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, "सुबह के समय कोहरा कम था, इसलिए टॉवर पर कुछ लटका हुआ साफ दिखाई दिया। पास जाकर देखा तो पता चला कि यह कोई और नहीं, बल्कि अक्सर यहां काम करने वाला कर्मचारी ही है। समझ नहीं आ रहा कि आखिर उसने ऐसा खौफनाक कदम क्यों उठाया।"
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मृतक की पहचान: धामपुर से जुड़ा है कनेक्शन

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पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब शिनाख्त की कार्रवाई शुरू की, तो मृतक की पहचान 53 वर्षीय मुकेश कुमार के रूप में हुई। मुकेश कुमार मूल रूप से बिजनौर जिले के धामपुर थाना क्षेत्र की मुन्नी देवी कॉलोनी के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम विशंभर दत्त बताया गया है।
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पुलिस जांच में पता चला है कि मुकेश कुमार इसी टॉवर की देखरेख और तकनीकी कार्यों के लिए कर्मचारी के तौर पर नियुक्त थे। वे अक्सर काम के सिलसिले में यहां आते रहते थे। लेकिन किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिस टॉवर पर वे काम करते हैं, उसी को वे अपनी मौत का जरिया बना लेंगे।
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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: बताई बीमारी की बात

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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मृतक के परिजनों को संपर्क किया। खबर सुनते ही धामपुर में रह रहे परिवार में कोहराम मच गया। आनन-फानन में परिजन बिजनौर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे।
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वहां मौजूद मुकेश के परिजनों ने पुलिस को कुछ अहम जानकारियां दी हैं, जो जांच की दिशा तय कर सकती हैं:
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    पारिवारिक स्थिति: मुकेश कुमार का परिवार भरा-पूरा था। उनकी दो बेटियां हैं, जिनकी वे शादी कर चुके हैं। इसके अलावा उनका एक बेटा भी है।
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    स्वास्थ्य समस्याएं: परिजनों ने बताया कि मुकेश पिछले काफी समय से शुगर (Diabetes) और ब्लड प्रेशर (BP) की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। लगातार दवाइयां लेने के बावजूद उनकी तबीयत में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था।
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    मानसिक तनाव: बीमारी के चलते वे अक्सर परेशान रहते थे। पुलिस आशंका जता रही है कि शायद बीमारी से तंग आकर या उससे उपजे मानसिक अवसाद (Depression) के चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया हो।
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पुलिस की कार्रवाई: टॉवर से शव उतारना था चुनौती

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शव टॉवर पर काफी ऊंचाई पर लटका हुआ था, जिसे नीचे उतारना पुलिस के लिए भी एक चुनौती थी। पुलिस ने स्थानीय लोगों और सीढ़ी की मदद से रस्से को काटा और शव को सावधानीपूर्वक नीचे उतारा।
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शहर कोतवाली प्रभारी ने बताया:

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"प्राथमिक दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। मृतक के शरीर पर चोट के कोई अन्य निशान नहीं मिले हैं, जो संघर्ष की ओर इशारा करते हों। हालांकि, मौत का सही कारण और समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। हमने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों की तहरीर के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।"
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सुलझानी होगी गुत्थी: आत्महत्या या कुछ और?

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भले ही परिजनों ने बीमारी की बात कही हो, लेकिन पुलिस अपनी जांच को सिर्फ एक पहलू तक सीमित नहीं रखना चाहती। पुलिस के सामने अभी कई सवाल हैं जिनके जवाब तलाशे जा रहे हैं:
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    क्या कोई और वजह थी? क्या बीमारी के अलावा कोई आर्थिक तंगी या पारिवारिक कलह भी थी?
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    मोबाइल की जांच: पुलिस मृतक मुकेश कुमार का मोबाइल फोन खंगाल रही है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आत्महत्या से पहले उन्होंने आखिरी बात किससे की थी। क्या उन्हें कोई परेशान कर रहा था?
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    सुसाइड नोट: पुलिस को मौके से अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। अगर कोई नोट मिलता है, तो उससे मौत की असली वजह साफ हो सकेगी।
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बढ़ते सुसाइड केस: एक चिंताजनक ट्रेंड

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बिजनौर में हुई यह घटना समाज में बढ़ते मानसिक तनाव और अवसाद की ओर भी इशारा करती है। 50 से 60 वर्ष की आयु वर्ग में आत्महत्या के मामले बढ़ना चिंता का विषय है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस उम्र में 'मिड लाइफ क्राइसिस', रिटायरमेंट की चिंता, गिरता स्वास्थ्य और बच्चों के सेटलमेंट का दबाव व्यक्ति को अंदर ही अंदर तोड़ देता है।
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मुकेश के मामले में भी शुगर और बीपी जैसी क्रॉनिक बीमारियां एक बड़ा कारण हो सकती हैं। मेडिकल साइंस के अनुसार, लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से व्यक्ति में डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन बढ़ने की संभावना रहती है।
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कार्यस्थल पर सुरक्षा के सवाल

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यह घटना कार्यस्थल की सुरक्षा और निगरानी पर भी सवाल खड़े करती है। एक कर्मचारी टॉवर पर चढ़ता है और फांसी लगा लेता है, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगती। क्या टॉवर परिसर में कोई सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं था? क्या वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे? पुलिस इन पहलुओं की भी जांच कर सकती है कि आखिर मुकेश टॉवर पर कब चढ़े और यह घटना रात की है या सुबह की।
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क्षेत्र में चर्चा का विषय

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साकेत कॉलोनी जैसे शांत और पॉश इलाके में हुई इस घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। कॉलोनी के लोग दबी जुबान में तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। कोई इसे बीमारी से तंग आकर दी गई जान बता रहा है, तो कोई इसे संदिग्ध मान रहा है।
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फिलहाल, पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की तफ्तीश के बाद ही इस रहस्य से पर्दा उठ पाएगा कि आखिर मुकेश ने अपनी जीवनलीला समाप्त करने का फैसला क्यों लिया।
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जांच जारी

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मुकेश कुमार की मौत ने उनके परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दिया है। एक पिता, एक पति और एक जिम्मेदार कर्मचारी का यूं चले जाना दुखद है। पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और अगर इसमें कोई भी दोषी पाया जाता है या उकसाने की बात सामने आती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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