बिजनौर: गंगा के कटान और बाढ़ की विभीषिका झेल रहे बिजनौर वासियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। जिले के रावली तटबंध (Ravli Embankment Bijnor) को अब स्थायी और आधुनिक सुरक्षा मिलने जा रही है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने गंगा बैराज से रावली तक के तटबंध को मजबूत करने के लिए 40 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि इस बार तटबंध का निर्माण अत्याधुनिक एसीबीएम (ACBM - Articulating Concrete Block Mattress) तकनीक से किया जाएगा।READ ALSO:-डिजिटल डकैती: मेरठ में 7 लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका, 54 लाख स्वाहा! एक क्लिक ने बर्बाद कर दिया सब कुछ
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य जनवरी के पहले सप्ताह में शुरू हो जाएगा और इसे अगली बरसात यानी मानसून सत्र से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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क्या है ACBM तकनीक और क्यों है खास?
\r\n\r\nसिंचाई विभाग इस बार पारंपरिक तरीकों से हटकर नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। रावली तटबंध (Ravli Embankment) के 1060 मीटर हिस्से को एसीबीएम तकनीक से लैस किया जाएगा।
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- \r\n मजबूत पकड़: इस तकनीक में कंक्रीट के ब्लॉक एक-दूसरे से जुड़े होते हैं जो एक 'मैट्रेस' या चटाई की तरह काम करते हैं।\r\n \r\n
- \r\n लचीलापन: यह तकनीक तटबंध को लचीलापन देती है, जिससे पानी के तेज बहाव में भी यह टूटता नहीं है बल्कि अपनी जगह पर जमा रहता है।\r\n \r\n
- \r\n सफल प्रयोग: प्रदेश में यह तकनीक नई है, लेकिन जहां भी इसका उपयोग हुआ है, वहां नदी के कटान को रोकने में इसे बेहद प्रभावी माना गया है।\r\n \r\n
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सितंबर की बाढ़ ने दी थी खतरे की घंटी
\r\n\r\nइस साल सितंबर माह में आई बाढ़ ने प्रशासन और ग्रामीणों की नींद उड़ा दी थी। गंगा का जलस्तर बढ़ने से रावली तटबंध की संरचना हिल गई थी। पानी के तेज बहाव के कारण तटबंध की मिट्टी कट गई थी और कई जगहों पर खतरनाक दरारें आ गई थीं।
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उस समय रावली, मिर्जापुर और खादर जैसे तटीय गांवों पर डूबने का खतरा मंडराने लगा था। स्थिति इतनी भयावह थी कि प्रशासन को गांवों में अलर्ट जारी करना पड़ा और कुछ परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा था।
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रात भर पहरा देते थे ग्रामीण
\r\n\r\nगंगा की धारा हर साल बरसात में गांवों की ओर खिसक रही है, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल रहता है। सितंबर की बाढ़ के दौरान स्थानीय ग्रामीणों, एनएचएआई (NHAI) और सिंचाई विभाग ने दिन-रात एक कर दिया था। भारी मशीनों से मिट्टी और पत्थर डालकर और स्लोप को संभालकर किसी तरह तटबंध को टूटने से बचाया गया था। अब पक्का निर्माण होने से ग्रामीणों को रात भर जागकर पहरा नहीं देना पड़ेगा।READ ALSO:-डिजिटल डकैती: मेरठ में 7 लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका, 54 लाख स्वाहा! एक क्लिक ने बर्बाद कर दिया सब कुछ
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अधिकारियों का क्या है कहना?
\r\n\r\nसिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ब्रजेश मौर्य ने बताया कि परियोजना के तहत न केवल तटबंध मजबूत होगा, बल्कि गंगा के बहाव को भी नियंत्रित किया जाएगा।
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- \r\n स्लोप की मजबूती: क्षतिग्रस्त तटबंध की स्लोपिंग को समतल और तकनीकी रूप से मजबूत किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n रेत के टापू हटाना: नदी के बीच में बने बड़े रेत के टापुओं (Sand Islands) को हटाया जाएगा ताकि पानी का सीधा दबाव तटबंध पर न पड़े और धारा का प्रवाह सुचारू रूप से बीच से होकर गुजरे।\r\n \r\n
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40 करोड़ की लागत से बनने वाला यह आधुनिक रावली तटबंध (Ravli Embankment) बिजनौर के तटीय इलाकों के लिए एक जीवनरक्षक कवच साबित होगा। जनवरी से शुरू होने वाला यह कार्य यदि समय पर पूरा हो जाता है, तो आगामी मानसून में रावली, मिर्जापुर और खादर के ग्रामीणों को बाढ़ के खौफ के साये में नहीं जीना पड़ेगा।
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बिजनौर के रावली तटबंध को 40 करोड़ रुपये की लागत से एसीबीएम तकनीक द्वारा मजबूत किया जाएगा। जनवरी से निर्माण शुरू होगा और अगली बरसात से पहले 1060 मीटर लंबा यह सुरक्षा कवच तैयार हो जाएगा, जिससे दर्जनों गांवों को बाढ़ से स्थायी राहत मिलेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.