बिजनौर (Bijnor News): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और प्रशासनिक अव्यवस्था की पोल खोलने वाली खबर सामने आई है। आमतौर पर परीक्षा केंद्रों पर छात्रों को शांतिपूर्ण माहौल और सुविधाएं देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बिजनौर शहर कोतवाली क्षेत्र में इसका ठीक उल्टा देखने को मिला। यहां परीक्षा देने आए दूर-दराज के छात्रों को न केवल मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा, बल्कि उनके साथ मारपीट और अभद्रता की शिकायतें भी सामने आई हैं।READ ALSO:-योगी सरकार का 'ऑपरेशन क्लीन': मेरठ में मंदिर के पास सजी अवैध मीट मंडी पर चला पुलिस का हंटर, 24 कारोबारियों पर नई BNS धाराओं में FIR!
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मामला बिजनौर शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बैराज रोड स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज (Polytechnic College) के पास बने खोखरा ग्राउंड का है। यह ग्राउंड एनसीसी (National Cadet Corps) के अधीन आता है। मंगलवार को इस मैदान में पार्किंग को लेकर एक ऐसा विवाद भड़का, जिसने कई घंटों तक पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया और पुलिस-प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद?

\r\n\r\n
मंगलवार का दिन बिजनौर पॉलिटेक्निक कॉलेज में डी-फार्मा (D-Pharma) के छात्रों की परीक्षा का दिन था। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए जिले के विभिन्न ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों से भारी संख्या में छात्र-छात्राएं अपनी-अपनी बाइकों और गाड़ियों से परीक्षा केंद्र पर पहुंचे थे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
चूंकि पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर के अंदर इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियों की पार्किंग की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं थी, इसलिए अधिकतर छात्रों ने अपनी गाड़ियां कॉलेज के ठीक पास स्थित 'खोखरा ग्राउंड' (Khokhra Ground) में खड़ी कर दीं। छात्रों को लगा कि परीक्षा देने के बाद वे अपनी गाड़ियां लेकर शांति से अपने घर लौट जाएंगे।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
लेकिन, खोखरा ग्राउंड एनसीसी का मैदान है और वहां एनसीसी कैडेट्स और अधिकारियों का नियंत्रण रहता है। जब छात्रों की गाड़ियां वहां बड़ी संख्या में खड़ी हो गईं, तो एनसीसी के अधिकारियों और वहां मौजूद कैडेट्स ने इसका कड़ा विरोध किया। यहीं से उस विवाद की नींव पड़ी, जिसने कुछ ही देर में एक बड़े हंगामे का रूप ले लिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

छात्रों के गंभीर आरोप: "मारपीट की और गाड़ियों की हवा निकाली"

\r\n\r\n
परीक्षा खत्म होने के बाद जब छात्र अपनी गाड़ियां लेने खोखरा ग्राउंड पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। छात्रों का आरोप है कि उनकी गाड़ियों को वहां से निकलने नहीं दिया जा रहा था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
परीक्षा देने आए छात्र सनी और मोहम्मद नाजिम ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जब उन्होंने अपनी गाड़ियां निकालने की कोशिश की, तो एनसीसी के अधिकारियों ने उनके साथ तीखी बहस शुरू कर दी। छात्रों का सीधा आरोप है कि इस बहस के दौरान एनसीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी (CO) ने एक युवक के साथ सरेआम मारपीट कर दी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इतना ही नहीं, छात्रों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने के लिए मैदान में मौजूद एनसीसी कैडेट्स ने कई दर्जन मोटरसाइकिलों और गाड़ियों के टायरों की हवा निकाल दी। जब छात्रों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें गेट से बाहर जाने से रोक दिया गया। तपती गर्मी और परीक्षा की थकान के बीच, दूर-दराज से आए छात्र अपनी गाड़ियों की हवा निकली देखकर बेबस हो गए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

एनसीसी का आरोप: "छात्रों ने तोड़ा मैदान का गेट"

\r\n\r\n
इस पूरे बवाल में ताली एक हाथ से नहीं बजी। जहां एक तरफ छात्रों ने मारपीट और बदसलूकी के आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी तरफ एनसीसी अधिकारियों का अपना अलग ही तर्क था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एनसीसी अधिकारियों का कहना था कि यह मैदान उनका आरक्षित क्षेत्र है और बिना अनुमति के यहां इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियां खड़ी करना नियमों का सरासर उल्लंघन है। अधिकारियों का सबसे बड़ा आरोप यह था कि जब छात्र अपनी गाड़ियां अंदर घुसा रहे थे या निकाल रहे थे, तो उस आपाधापी में मैदान का मुख्य गेट टूट गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एनसीसी के अधिकारियों ने साफ शब्दों में फरमान सुना दिया कि जब तक इस टूटे हुए गेट की मरम्मत नहीं हो जाती और नुकसान की भरपाई नहीं की जाती, तब तक किसी भी छात्र को उसकी गाड़ी मैदान से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस जिद ने मामले को और ज्यादा उलझा दिया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्रशासनिक अमले की एंट्री: तहसीलदार और पुलिस के भी छूटे पसीने

\r\n\r\n
खोखरा ग्राउंड में कई दर्जन छात्रों को रोके जाने और हंगामे की सूचना जैसे ही बिजनौर प्रशासन को लगी, महकमे में हड़कंप मच गया। स्थिति को बेकाबू होता देख आनन-फानन में बिजनौर शहर कोतवाली पुलिस, राजस्व विभाग की टीम और स्थानीय तहसीलदार पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों (छात्रों और एनसीसी अधिकारियों) के बीच मध्यस्थता (Mediation) कराने और मामले को शांत करने का प्रयास किया। प्रशासन का तर्क था कि छात्र परीक्षा देने आए हैं और उन्हें इस तरह से रोक कर रखना उचित नहीं है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
लेकिन, प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो एनसीसी के अधिकारी अपने रुख पर पूरी तरह से अड़े रहे। उन्होंने तहसील प्रशासन और पुलिस की बात सुनने से भी साफ इनकार कर दिया। एनसीसी सीओ का स्पष्ट कहना था कि जब तक गेट का पैसा नहीं मिलेगा या गेट ठीक नहीं होगा, कोई भी गाड़ी बाहर नहीं जाएगी। पुलिस और प्रशासन की टीम वहां काफी देर तक मूकदर्शक बनी रही और दोनों पक्षों को मनाने की जद्दोजहद चलती रही।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मजबूरी और बेबसी: छात्रों ने चंदा इकट्ठा कर सुलझाया मामला

\r\n\r\n
जब पुलिस और प्रशासन भी एनसीसी अधिकारियों की जिद के आगे बेबस नजर आए, तो दूर-दराज से आए छात्रों को समझ आ गया कि उनकी मदद करने वाला कोई नहीं है। दोपहर ढल रही थी और कई छात्रों को अपने गांव पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अंततः, हार मानकर परीक्षा देने आए उन तमाम परीक्षार्थियों ने एक बेहद मजबूरी भरा कदम उठाया। उन्होंने आपस में पैसे मिलाए और 'चंदा' (Crowdfunding) इकट्ठा करना शुरू किया। कुछ-कुछ रुपये जोड़कर एक राशि एकत्रित की गई और फिर उस पैसे से खोखरा ग्राउंड के टूटे हुए गेट की मरम्मत का काम शुरू करवाया गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जब तक गेट पूरी तरह से दुरुस्त नहीं हो गया, तब तक छात्रों को वहां बंधक जैसी स्थिति में रहना पड़ा। गेट की मरम्मत पूरी होने और एनसीसी अधिकारियों की तसल्ली हो जाने के बाद ही, जाकर कहीं उस मैदान के दरवाजे खोले गए और छात्रों को उनकी गाड़ियां सौंप कर वहां से जाने दिया गया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कई गंभीर सवाल खड़े करती है यह घटना

\r\n\r\n
बिजनौर की यह घटना कोई मामूली विवाद नहीं है; यह हमारे सिस्टम की कई खामियों को उजागर करती है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था: जब किसी कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है, तो प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन वहां पार्किंग की उचित व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं करते?
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    प्रशासन की बेबसी: मौके पर मौजूद पुलिस और तहसीलदार एनसीसी अधिकारियों के अड़ियल रवैये के सामने इतने बेबस क्यों दिखे? क्या एक सरकारी मैदान के गेट की मरम्मत के लिए छात्रों से चंदा वसूलना न्यायसंगत था?
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    छात्रों के साथ दुर्व्यवहार: परीक्षा देकर निकले तनावग्रस्त छात्रों के साथ मारपीट करना और उनकी गाड़ियों की हवा निकाल देना किस हद तक सही है?
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस पूरे घटनाक्रम पर एनसीसी के जिम्मेदार अधिकारियों और मौके पर पहुंचे तहसीलदार से उनका आधिकारिक पक्ष (Official Version) जानने के लिए मीडिया द्वारा कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी भी अधिकारी ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया और उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
फिलहाल, बिजनौर में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। छात्रों और उनके परिजनों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के लिए पार्किंग की कोई ठोस व्यवस्था करेगा, या फिर ऐसे ही छात्र प्रशासन और अन्य विभागों के बीच पिसते रहेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें