बिजनौर (उत्तर प्रदेश): अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में बिजनौर पुलिस ने अपनी मुस्तैदी और कार्यकुशलता का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी हर तरफ भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है। जनपद बिजनौर के थाना कोतवाली शहर क्षेत्र से एक दिन पहले लापता हुए यानी अपहृत किए गए एक मासूम बच्चे को पुलिस ने महज 24 घंटे के अंदर सकुशल बरामद कर लिया है। इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी को भी पुलिस ने धर दबोचा है। इस पूरी कार्रवाई में थाना पुलिस के साथ-साथ जिले की एसओजी (SOG) और स्वाट (SWAT) टीम की भूमिका बेहद अहम रही।
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​कैसे हुई घटना की शुरुआत: 3 मई का वह खौफनाक दिन

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घटना की शुरुआत 3 मई 2026 को हुई। थाना कोतवाली शहर क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक परिवार का मासूम बच्चा अचानक घर के आस-पास से खेलते हुए संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। परिवार वालों ने पहले अपने स्तर पर बच्चे की काफी खोजबीन की। गली-मोहल्ले, रिश्तेदारों और संभावित जगहों पर बच्चे को तलाशा गया, लेकिन जब उसका कहीं कोई सुराग नहीं लगा, तो परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों को किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी थी।
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​शाम होते-होते जब बच्चे का कोई पता नहीं चला, तो बदहवास परिजनों ने तुरंत थाना कोतवाली शहर पुलिस का रुख किया। पुलिस को दी गई तहरीर में परिजनों ने बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनके मासूम बच्चे को बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में भी सनसनी फैल गई, क्योंकि मामला एक छोटे बच्चे के अपहरण से जुड़ा हुआ था।
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​पुलिस अधीक्षक (SP) के कड़े निर्देश और एक्शन प्लान

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बच्चे के अपहरण की गंभीरता को देखते हुए थाना स्तर पर तुरंत आला अधिकारियों को सूचना दी गई। जनपद के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया। अपहरण जैसे गंभीर अपराध में समय सबसे मूल्यवान होता है, इसे समझते हुए पुलिस अधीक्षक ने बिना कोई देरी किए तुरंत कई पुलिस टीमों का गठन किया।
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​इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए केवल स्थानीय थाना पुलिस पर निर्भर न रहकर, जिले की सबसे तेज तर्रार मानी जाने वाली स्वाट (SWAT - Special Weapons and Tactics) टीम और एसओजी (SOG - Special Operations Group) टीम को भी इस 'ऑपरेशन रेस्क्यू' में उतार दिया गया। एसपी की तरफ से सभी टीमों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी भी कीमत पर बच्चे को जल्द से जल्द और सकुशल बरामद करना है, साथ ही आरोपी को भी सलाखों के पीछे पहुंचाना है।
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​सर्विलांस, तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर तंत्र का हुआ इस्तेमाल

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आज के डिजिटल युग में पुलिस की कार्यप्रणाली भी पूरी तरह से हाई-टेक हो चुकी है। इस अपहरण के मामले को सुलझाने के लिए पुलिस टीमों ने पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ तकनीकी साक्ष्यों का भरपूर इस्तेमाल किया। सबसे पहले घटनास्थल और उसके आस-पास के रास्तों पर लगे तमाम सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज के माध्यम से संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास किया गया।
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​इसके साथ ही, पुलिस की सर्विलांस टीम ने इलाके के मोबाइल टावर डंप डेटा की भी जांच शुरू कर दी। वहीं दूसरी ओर, पुलिस के ग्राउंड इंटेलिजेंस यानी मुखबिर तंत्र को भी पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया। मुखबिरों को बच्चे का हुलिया और संदिग्ध की संभावित जानकारी दी गई। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों से मिलने वाली हर छोटी-बड़ी इनपुट का पुलिस टीमें बारीकी से विश्लेषण कर रही थीं।
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​4 मई का दिन: पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी

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पुलिस की रात-दिन की अथक मेहनत आखिरकार रंग लाई। 4 मई 2026 को सर्विलांस और मुखबिर खास से पुलिस को एक अहम सुराग हाथ लगा। पुलिस को आरोपी की सटीक लोकेशन के बारे में जानकारी मिली कि वह बच्चे को लेकर किस इलाके में छिपा हुआ है या कहां से भागने की फिराक में है।
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​सूचना मिलते ही एसओजी, स्वाट और थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने पूरी तरह से घेराबंदी करते हुए संबंधित ठिकाने पर दबिश दी। पुलिस की इस अचूक रणनीति के सामने आरोपी चकमा नहीं दे सका। टीम ने मौके से अगवा किए गए मासूम बच्चे को बिल्कुल सुरक्षित और सकुशल हालत में बरामद कर लिया। बच्चे को देखते ही पुलिस टीम ने भी राहत की सांस ली।
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​आरोपी फिरोज पुलिस की गिरफ्त में

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बच्चे की सकुशल बरामदगी के साथ ही पुलिस ने वहां से अपहरण की इस वारदात को अंजाम देने वाले शातिर आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान फिरोज पुत्र इफ्तखार, निवासी थाना कोतवाली शहर, जनपद बिजनौर के रूप में हुई है।
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​शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी ने ही मासूम को बहला-फुसलाकर उसका अपहरण किया था। हालांकि, आरोपी का असली मकसद क्या था—क्या वह फिरौती मांगना चाहता था, या इसके पीछे कोई और आपराधिक मंशा थी—पुलिस इन सभी पहलुओं पर आरोपी फिरोज से सघन पूछताछ कर रही है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत थाना कोतवाली शहर में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और उसे न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेजने की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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​परिजनों के छलक पड़े खुशी के आंसू

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जैसे ही बच्चे के सुरक्षित होने की खबर उसके माता-पिता और परिजनों को मिली, उनके खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 24 घंटे से जिस घर में मातम जैसा माहौल था और चूल्हा तक नहीं जला था, वहां अचानक खुशियां लौट आईं। पुलिस जब बच्चे को लेकर थाने पहुंची और उसे उसके माता-पिता के सुपुर्द किया, तो वह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। परिजनों ने रोते हुए पुलिस अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और बिजनौर पुलिस की कार्यप्रणाली की जमकर तारीफ की।
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​क्षेत्र में शांति और पुलिस का संदेश

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इस पूरी घटना के बाद से कोतवाली शहर क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। वर्तमान में स्थिति पूरी तरह से सामान्य और शांतिपूर्ण है। बिजनौर पुलिस ने इस घटना के माध्यम से जिले के सभी अपराधियों को एक कड़ा संदेश भी दिया है कि किसी भी तरह के अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अपराधियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी।
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​साथ ही, पुलिस प्रशासन ने आम जनता और विशेषकर अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने छोटे बच्चों का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को अकेले बाहर न जाने दें और उन्हें यह भी सिखाएं कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के दिए हुए प्रलोभन में न आएं और उनसे कोई भी खाने-पीने की वस्तु न लें।
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बिजनौर पुलिस, SOG और SWAT टीम की यह संयुक्त कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि यदि पुलिस प्रशासन दृढ़ संकल्प ले ले, तो बड़े से बड़े अपराध का भी त्वरित पर्दाफाश किया जा सकता है। 24 घंटे के भीतर मासूम की सकुशल वापसी न केवल पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह आम जनता के मन में खाकी के प्रति विश्वास को और अधिक मजबूत करती है। पुलिस अब इस मामले की चार्जशीट जल्द से जल्द न्यायालय में पेश कर आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की तैयारी में जुट गई है।
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