बिजनौर (खबरीलाल डेस्क):
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Anil Kumar Sharma, Special Correspondent-आज के आधुनिक दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर दफ्तरों, कारखानों और विभिन्न संस्थानों में काम करने वाली महिलाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। लेकिन, इसके साथ ही कार्यस्थल (Workplace) पर उनकी सुरक्षा और सम्मान भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित और भयमुक्त माहौल प्रदान करने के उद्देश्य से ही देश में PoSH Act-2013 लागू किया गया था। इसी महत्वपूर्ण कानून के प्रति ग्रामीण और कामकाजी महिलाओं को जागरूक करने के लिए बिजनौर जिले में एक विशेष 'विधिक साक्षरता शिविर' (Legal Literacy Camp) का सफल आयोजन किया गया।
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​प्राधिकरण के एक्शन प्लान के तहत हुआ आयोजन

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​जानकारी के अनुसार, माननीय उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UP State Legal Services Authority), लखनऊ द्वारा माह जुलाई 2026 के लिए एक विशेष एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इसी एक्शन प्लान के तहत और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), बिजनौर के कड़े व स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में जिले के ग्राम मिलक जहांगीराबाद में इस महत्वपूर्ण विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य विषय 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013' यानी PoSH Act-2013 रखा गया था।
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​इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की उन महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराना था, जो विभिन्न स्थानों पर काम करने जाती हैं लेकिन कानूनी जानकारी के अभाव में अपने साथ होने वाले दुर्व्यवहार को चुपचाप सहने पर मजबूर हो जाती हैं।
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​क्या है PoSH Act और यौन उत्पीड़न के दायरे में क्या-क्या आता है?

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​शिविर में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पैरा लीगल वालंटियर (P.L.V.) जयवीर सिंह ने उपस्थित महिलाओं और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए PoSH एक्ट की बारीकियों को बेहद सरल और स्पष्ट शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि यह एक्ट विशेष रूप से कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध व उसके निवारण के लिए बनाया गया है।
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​अक्सर महिलाओं को यह पता ही नहीं होता कि यौन उत्पीड़न के दायरे में कौन-कौन सी गतिविधियां आती हैं। पी.एल.वी. जयवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि यौन उत्पीड़न केवल शारीरिक हमला नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत कई अन्य अवांछित गतिविधियां भी शामिल हैं, जैसे:
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    ​अवांछित शारीरिक संपर्क: किसी भी महिला को उसकी मर्जी के बिना गलत नीयत से छूना या शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश करना।
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    ​यौन संबंध की मांग: कार्यस्थल पर प्रमोशन या नौकरी बचाने का लालच देकर अथवा दबाव बनाकर यौन संबंधों की मांग करना या अनुरोध करना।
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    ​अश्लील टिप्पणियां: महिला के पहनावे, उसके शरीर या उसके चरित्र को लेकर भद्दी और अश्लील टिप्पणियां करना।
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    ​गंदे इशारे करना: आंखों या हाथों से ऐसे इशारे करना जो महिला को असहज महसूस कराएं।
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    ​अश्लील तस्वीरें दिखाना: मोबाइल, कंप्यूटर या किसी अन्य माध्यम से महिला को अश्लील वीडियो या तस्वीरें (Pornography) दिखाना।
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10 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थान में ICC का गठन अनिवार्य

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​शिविर में कामकाजी महिलाओं के अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की गई। पी.एल.वी. ने कानून के उस अहम प्रावधान की जानकारी दी जिसके तहत यदि किसी भी संस्थान, फैक्ट्री, दफ्तर या कंपनी में 10 या उससे अधिक कर्मचारी (जिसमें महिलाएं भी शामिल हों) काम करते हैं, तो उस संस्थान के प्रबंधन के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee - ICC) का गठन करना कानूनी रूप से पूरी तरह अनिवार्य है। इस समिति की अध्यक्षता किसी वरिष्ठ महिला कर्मचारी द्वारा ही की जानी चाहिए, ताकि पीड़ित महिला बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात रख सके।
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​शिकायत दर्ज कराने की समय सीमा और प्रक्रिया

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​महिलाओं को न्याय की प्रक्रिया समझाते हुए बताया गया कि यदि किसी महिला के साथ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की कोई घटना होती है, तो उसे चुप नहीं बैठना चाहिए। पीड़ित महिला घटना के घटित होने के तीन माह (90 दिन) के भीतर लिखित रूप में इसकी शिकायत संस्थान की आंतरिक समिति (ICC) को कर सकती है। शिकायत प्राप्त होने के बाद, समिति की यह जिम्मेदारी होती है कि वह 90 दिनों के भीतर अपनी निष्पक्ष जांच पूरी करे और प्रबंधन को अपनी रिपोर्ट सौंपे।
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यदि ICC न हो तो कहां करें शिकायत?

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कई बार असंगठित क्षेत्रों या छोटे संस्थानों में आंतरिक समिति गठित नहीं होती है। ऐसे मामलों के लिए शिविर में बताया गया कि पीड़ित महिला सीधे जिले स्तर पर गठित 'लोकल शिकायत समिति' (Local Complaints Committee - LCC) में अपनी लिखित शिकायत दर्ज करा सकती है। प्रशासन इस समिति के माध्यम से महिला को न्याय दिलाने के लिए बाध्य है।
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भारतीय न्याय संहिता (BNS 75) के तहत सजा के कड़े प्रावधान

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​देश में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों का जिक्र करते हुए पी.एल.वी. ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मिलने वाली सजा के बारे में भी जागरूक किया। उन्होंने बताया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले ऐसे अपराधों को अब और भी गंभीरता से लिया जा रहा है।
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    ​गंभीर शारीरिक संपर्क या अवांछित मांग: BNS की धारा 75 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कार्यस्थल पर किसी महिला के साथ गंभीर अवांछित शारीरिक संपर्क करता है या यौन संबंधों की अवांछित मांग करता है, तो दोष सिद्ध होने पर उसे 3 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा हो सकती है।
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    ​अश्लील टिप्पणी करने पर सजा: यदि कोई व्यक्ति केवल भद्दी या अश्लील टिप्पणी करके महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, तो उसके लिए भी कानून में एक वर्ष की जेल का कड़ा प्रावधान किया गया है।
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बड़ी संख्या में महिलाओं और समाजसेवियों ने लिया भाग

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​ग्राम मिलक जहांगीराबाद में आयोजित इस विधिक साक्षरता शिविर को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने ध्यानपूर्वक अपने कानूनी अधिकारों को सुना और अपनी शंकाओं का समाधान भी किया। इस महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने में पी.एल.वी. राजीव कुमार सहित गांव की कई जागरूक महिलाओं ने अपनी अहम भूमिका निभाई। शिविर में मुख्य रूप से रीता सिंह, मीनाक्षी देवी, बबीता, मंजू, संतोष कुमारी, वन्दना, उपमा आदि महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
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​खबरीलाल डेस्क का विश्लेषण:

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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर की यह पहल निश्चित तौर पर ग्रामीण और कामकाजी महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। जब तक महिलाएं अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगी, तब तक कार्यस्थल पर शोषण को पूरी तरह से खत्म करना संभव नहीं है। PoSH Act जैसे कानूनों का ज्ञान महिलाओं को वो हिम्मत देता है, जिससे वे अपने खिलाफ होने वाले किसी भी अन्याय का डटकर मुकाबला कर सकें। खबरीलाल मीडिया समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं से अपील करता है कि वे अपने अधिकारों को जानें और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
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