उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बार फिर से रूह को सुकून देने वाली और समाज को एक सकारात्मक संदेश देने वाली खबर सामने आई है। जिले के लोकप्रिय क्षेत्र कमालपुर स्थित प्रतिष्ठित मदरसा तजवीदुल कुरआन में हाल ही में 'कुरआन-ए-करीम की तकमील' (कुरआन शरीफ का पाठ पूरा होने) के पावन अवसर पर एक भव्य और गरिमामय धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस रूहानी जलसे में शिरकत करने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग, उलेमा, मदरसे के शिक्षक और छात्र एकत्रित हुए थे। कार्यक्रम के दौरान पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा था।
\r\n\r\nमुफ्ती मुहम्मद कासिम कासमी का विशेष संबोधन: सच्चाई और भाईचारे की सीख
\r\n\r\nकार्यक्रम के मुख्य आकर्षण और वक्ता के रूप में प्रख्यात इस्लामिक विद्वान मुफ्ती मुहम्मद कासिम कासमी मकसूदपुरी ने शिरकत की। उन्होंने अपनी ओपस्वी और ज्ञानवर्धक शैली में उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। मुफ्ती कासमी ने कुरआन-ए-करीम की तालीम, उसके इतिहास और इंसानियत के लिए इसके संदेशों पर बेहद गहराई से प्रकाश डाला।
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अपने संबोधन में उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित बातों पर जोर दिया:
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- \r\n सच्चाई का मार्ग: कुरआन-ए-करीम इंसान को हमेशा सच बोलने और जिंदगी के हर मोड़ पर सच्चाई का साथ देने की प्रेरणा देता है।\r\n \r\n
- \r\n आपसी भाईचारे का संदेश: इस्लाम का पैगाम हमेशा से मानवता, प्रेम और आपसी सौहार्द का रहा है। समाज में हर वर्ग और समुदाय के साथ मिलजुलकर रहना ही असली इंसानियत है।\r\n \r\n
- \r\n अमन और शांति: दुनिया की तमाम परेशानियों का हल केवल आपसी भाईचारे और शांति के रास्ते पर चलकर ही निकाला जा सकता है।\r\n \r\n

मदरसों की भूमिका और छात्रों में दिखा उत्साह
\r\n\r\nइस धार्मिक और शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान मदरसा तजवीदुल कुरआन के छात्र-छात्राओं का उत्साह देखने लायक था। मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों ने जिस लगन और मेहनत के साथ कुरआन-ए-करीम की तालीम हासिल की है, वह क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। इस प्रकार के आयोजन न केवल बच्चों का हौसला बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों और धार्मिक अनुशासन की मजबूत नींव भी प्रदान करते हैं।
\r\n\r\nकार्यक्रम स्थल पर मदरसे के शिक्षक, प्रबंधक और क्षेत्र के गणमान्य लोग पूरी तन्मयता के साथ मौजूद रहे। हर किसी के चेहरे पर इस बात की संतुष्टि साफ झलक रही थी कि नई पीढ़ी को सही रास्ते पर लाने और धार्मिक ज्ञान के साथ अच्छे संस्कार देने में ऐसे संस्थान अहम भूमिका निभा रहे हैं।
\r\n\r\nदेश और समाज की खुशहाली के लिए उठी दुआएं
\r\n\r\nकिसी भी धार्मिक जलसे या कार्यक्रम का सबसे खूबसूरत हिस्सा उसकी दुआ और अंत होता है। मदरसा तजवीदुल कुरआन में आयोजित इस तकमील कार्यक्रम का समापन भी बेहद भावुक और पवित्र माहौल में दुआ के साथ हुआ।
\r\n\r\nकार्यक्रम के अंत में सभी लोगों ने हाथ उठाकर देश और समाज की भलाई के लिए प्रार्थना की। इस विशेष दुआ में मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें शामिल रहीं:
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- \r\n अमन-चैन: देश और पूरी दुनिया में शांति, सुरक्षा और अमन-चैन कायम रहे।\r\n \r\n
- \r\n खुशहाली: समाज का हर वर्ग आर्थिक और सामाजिक रूप से तरक्की करे और देश में खुशहाली आए।\r\n \r\n
- \r\n आपसी सौहार्द: देशवासियों के बीच आपसी भाईचारा और प्रेम हमेशा बना रहे, किसी भी तरह की नफरत या वैमनस्यता के लिए समाज में कोई जगह न हो।\r\n \r\n
- \r\n बेहतरी: मदरसे के छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और उनकी शिक्षा में निरंतर प्रगति के लिए विशेष प्रार्थना की गई।\r\n \r\n
बिजनौर की सांस्कृतिक और सामाजिक मिसाल
\r\n\r\nबिजनौर जिला अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में जाना जाता है। कमालपुर के इस मदरसे में हुआ यह आयोजन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे धार्मिक शिक्षाएं लोगों को आपस में जोड़ने और दिलों को करीब लाने का काम करती हैं। जब युवा और बच्चे कुरआन जैसी पवित्र किताबों की तालीम हासिल कर समाज में शांति और इंसानियत का पैगाम फैलाते हैं, तो यह पूरे देश के लिए एक सकारात्मक संकेत होता है।
\r\n\r\nइस आयोजन की सफलता के बाद कमालपुर और आसपास के इलाकों के लोगों में काफी खुशी का माहौल है। लोगों का मानना है कि इस तरह के धार्मिक और शैक्षणिक कार्यक्रम भविष्य में भी होते रहने चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति, धर्म और नैतिकता से जुड़ी रहे तथा समाज को एक सही दिशा दे सके।
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