जेल निरीक्षण के दौरान मस्जिद से तेज आवाज सुनाई देने के बाद एसपी केके बिश्नोई ने दिए सख्त निर्देश, चांदपुर में 80 और धामपुर में एक दर्जन से ज्यादा लाउडस्पीकर हटाए गए
\r\nबिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों को लेकर प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया है। जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान मस्जिद से तेज आवाज में अजान सुनाई देने के बाद पुलिस-प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के पालन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। एसपी केके बिश्नोई के निर्देश के बाद जिले में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों की जांच और उन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है।
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\r\nरिपोर्ट के मुताबिक, अभियान के शुरुआती चरण में 90 से ज्यादा लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं, जबकि कार्रवाई अभी जारी है। चांदपुर क्षेत्र में करीब 80 और धामपुर में एक दर्जन से अधिक लाउडस्पीकर हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन की ओर से यह अभियान तीन दिन तक चलाए जाने की बात कही गई है।
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\r\nहालांकि, प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी धर्म की धार्मिक गतिविधियों को रोकना नहीं है। कार्रवाई का केंद्र ध्वनि की निर्धारित सीमा और सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन है।
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\r\nजेल निरीक्षण के दौरान सामने आया पूरा मामला
\r\nदरअसल, बिजनौर के एसपी केके बिश्नोई और जिलाधिकारी जसजीत कौर जिला कारागार का निरीक्षण करने पहुंचे थे। अधिकारी जेल की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे थे। इसी दौरान जेल के बराबर में स्थित एक मस्जिद से तेज आवाज में अजान सुनाई दी।
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\r\nबताया गया कि तेज आवाज के कारण अधिकारियों के निरीक्षण में व्यवधान पैदा हुआ। इसके बाद एसपी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। यहीं से धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और उसकी आवाज को लेकर जिले में अभियान तेज होने की बात सामने आई।
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\r\nएसपी ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थल पर धार्मिक गतिविधियां जारी रह सकती हैं, लेकिन लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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\r\nSP केके बिश्नोई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला
\r\nबिजनौर एसपी ने शासन के निर्देशों और अदालतों के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों की आवाज निर्धारित सीमा के भीतर रहनी चाहिए और अनावश्यक रूप से परिसर से बाहर नहीं जानी चाहिए।
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\r\nएसपी के मुताबिक, मंदिर हो या मस्जिद, वहां धार्मिक गतिविधियों के दौरान ध्वनि की सीमा का ध्यान रखना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है। मंदिरों में पुजारी और मस्जिदों में मुतवल्ली या प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लाउडस्पीकर की आवाज नियमों के अनुरूप हो।
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\r\nउन्होंने यह भी संकेत दिया कि पुलिस को बार-बार एक ही बात समझाने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए। धार्मिक स्थलों के जिम्मेदार लोगों को खुद नियमों का पालन करते हुए प्रशासन का सहयोग करना चाहिए।
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\r\n90 से ज्यादा लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई
\r\nएसपी के निर्देश के बाद बिजनौर में अभियान को लेकर पुलिस सक्रिय हो गई है। सामने आई जानकारी के अनुसार, 90 से अधिक लाउडस्पीकर धार्मिक स्थलों से हटाए गए हैं।
\r\nचांदपुर में कार्रवाई का आंकड़ा सबसे ज्यादा बताया जा रहा है, जहां करीब 80 लाउडस्पीकर हटाए जाने की जानकारी है। वहीं धामपुर में भी एक दर्जन से ज्यादा लाउडस्पीकर हटाए गए हैं।
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\r\nप्रशासन की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में नियमों की जांच की जा रही है। अभियान के दौरान यह देखा जा रहा है कि धार्मिक स्थलों पर लगे ध्वनि विस्तारक यंत्र निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। जिन स्थानों पर नियमों का पालन नहीं हो रहा है, वहां संबंधित लोगों को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं।
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\r\nतीन दिन तक चलेगा अभियान, धार्मिक स्थलों पर नजर
\r\nप्रशासन के निर्देश के बाद यह अभियान केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहने वाला है। जानकारी के मुताबिक, जिले में करीब तीन दिन तक अभियान चलाकर लाउडस्पीकरों की स्थिति की जांच की जाएगी।
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\r\nपुलिस-प्रशासन का फोकस ऐसे लाउडस्पीकरों पर है जिनकी आवाज निर्धारित सीमा से ज्यादा है या जिनसे आसपास के लोगों को परेशानी हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का पालन कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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\r\nइस कार्रवाई के बाद जिले के धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में भी हलचल बढ़ गई है। कई स्थानों पर लोग खुद ही लाउडस्पीकर हटाने या उनकी आवाज कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।
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\r\nदिन और रात के लिए अलग-अलग ध्वनि मानक
\r\nएसपी ने ध्वनि मानकों का जिक्र करते हुए बताया कि अलग-अलग क्षेत्रों और समय के लिए अलग-अलग सीमा निर्धारित की गई है। रिहायशी इलाकों में दिन के समय 55 डेसीबल और रात में 45 डेसीबल की सीमा बताई गई है।
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\r\nवहीं वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए दिन और रात के अलग-अलग मानक लागू होते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ध्वनि की तीव्रता निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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\r\nयहां यह समझना जरूरी है कि लाउडस्पीकर से जुड़ा मुद्दा मुख्य रूप से ध्वनि प्रदूषण से संबंधित है। इसे वायु प्रदूषण से अलग समझा जाना चाहिए। तेज आवाज से आसपास रहने वाले लोगों, बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और अन्य लोगों को परेशानी हो सकती है, इसलिए ध्वनि की सीमा को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाए गए हैं।
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\r\nप्रशासन बोला- धार्मिक आजादी पर रोक नहीं, नियमों का पालन जरूरी
\r\nबिजनौर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिकारियों ने धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाने की बात नहीं कही है। प्रशासन का जोर केवल इस बात पर है कि धार्मिक आयोजन के दौरान इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर की आवाज नियमों के दायरे में रहे।
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\r\nएसपी केके बिश्नोई ने धार्मिक स्थलों के जिम्मेदार लोगों से सहयोग की अपील की है। उनका कहना है कि अगर सभी लोग पहले से तय नियमों का पालन करें तो पुलिस को बार-बार कार्रवाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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\r\nनए SP के निर्देश के बाद दिखा सख्त रुख
\r\nकेके बिश्नोई ने हाल ही में बिजनौर के पुलिस अधीक्षक का पद संभाला है। इससे पहले वह संभल में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। बिजनौर में जिम्मेदारी संभालने के बाद लाउडस्पीकर के मामले में सामने आई यह कार्रवाई प्रशासन के सख्त रुख का संकेत मानी जा रही है।
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\r\nअब नजर इस बात पर रहेगी कि तीन दिवसीय अभियान के दौरान जिले के अन्य क्षेत्रों में कितने लाउडस्पीकरों की जांच होती है और कितने हटाए जाते हैं। फिलहाल प्रशासन का संदेश साफ है—धार्मिक आयोजन अपनी जगह, लेकिन ध्वनि की सीमा और कानून का पालन जरूरी है।
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