बिजनौर/मेरठ (खबरीलाल मीडिया डेस्क):
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उत्तराखंड की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में अब विकास और औद्योगिक निवेश की एक नई इबारत लिखी जा रही है। जनपद से होकर गुजरने वाले महत्वपूर्ण मेरठ-पौड़ी हाईवे (NH-119) और प्रस्तावित गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के समानांतर एक विशाल औद्योगिक गलियारा (Industrial Corridor) स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
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​इस मेगा प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा/UPEIDA) ने बिजनौर की तहसील सदर के 10 चयनित गांवों में सरकारी और निजी भूमि के अंश निर्धारण (Land Apportionment) का कार्य विधिवत रूप से शुरू कर दिया है। यह प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण की दिशा में सबसे निर्णायक कदम है।
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यूपीडा (UPEIDA) का एक्शन प्लान और 10 गांवों का चयन

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​बिजनौर में भूमि की प्रचुर उपलब्धता है, लेकिन औद्योगिक दृष्टि से यह जनपद अभी तक काफी हद तक अछूता रहा है। इसी गैप को भरने के लिए प्रदेश सरकार ने यहां हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारे उद्योग स्थापित करने की योजना बनाई है।
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    ​अंश निर्धारण की शुरुआत: यूपीडा के भू-अर्जन अधिकारी राकेश कुमार गुप्ता ने गुरुवार को तहसील सदर के सभाकक्ष में एक अहम बैठक की। इस बैठक में प्रस्तावित गांवों में सरकारी और निजी भूमि के अंश निर्धारण कार्य की बिंदुवार समीक्षा की गई।
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    ​1359 फसली का मानक: अधिकारी राकेश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अंश निर्धारण का यह पूरा काम 1359 फसली के आधार पर सरकारी अभिलेखों से किया जा रहा है।
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    ​सत्यापन प्रक्रिया: निजी भूमि के मालिकों और सरकारी जमीन के अंश को तय करने के साथ-साथ इन गांवों में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों—जैसे नदी, नालों और किसानों के नलकूपों (Tube-wells)—का भी भौतिक सत्यापन किया जा रहा है, ताकि भविष्य में अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह निर्विवाद रहे।
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    ​अधिकारियों की मौजूदगी: इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में तहसीलदार सदर आशीष सक्सेना और इन सभी चयनित 10 गांवों के लेखपाल विशेष रूप से मौजूद रहे।
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किन गांवों की जमीन का होगा अधिग्रहण?

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​जून 2026 में यूपीडा के अधिकारियों, नायब तहसीलदार सार्थक चावला और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने इन क्षेत्रों का सघन स्थलीय निरीक्षण किया था। इस औद्योगिक गलियारे के लिए जिन प्रमुख गांवों की भूमि को सर्वे के दायरे में रखा गया है, उनमें शामिल हैं:
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​ग्राम पपावर खुर्द, इस्लामपुर जलाल, अलीपुर माखन, खाना पट्टी, उलकपुर, स्वाहेड़ी बुजुर्ग, यूसुफाबाद, किशनपुर और मुंढाला आदि।
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प्रोजेक्ट की बैकबोन: गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे

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​बिजनौर में बन रहे इस औद्योगिक गलियारे की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां से गुजरने वाला गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे है। यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पश्चिमी यूपी को सीधे पूर्वी यूपी से जोड़ेगा।
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    ​लंबाई और दायरा: करीब 700 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा।
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    ​22 जिलों से कनेक्टिविटी: यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर से शुरू होकर संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, लखनऊ, बरेली, मुरादाबाद, अमरोहा और बिजनौर से होते हुए मुजफ्फरनगर और शामली तक जाएगा।
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    ​समय की भारी बचत: वर्तमान में गोरखपुर से शामली या दिल्ली-एनसीआर आने में 15 घंटे से अधिक का समय लगता है। इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह सफर मात्र 8 घंटे में सिमट जाएगा।
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    ​परियोजना की लागत: इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत 35,000 करोड़ रुपये है और इसका निर्माण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा किया जाएगा।
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​मेरठ-पौड़ी हाईवे (NH-119) से सीधा लाभ

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​खबरीलाल नेटवर्क की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, केवल एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे (NH-119) भी इस गलियारे के लिए जीवनरेखा का काम करेगा।
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यह हाईवे सीधे तौर पर मेरठ, बिजनौर और उत्तराखंड (पौड़ी/कोटद्वार) को आपस में जोड़ता है। मेरठ से बिजनौर तक की कनेक्टिविटी बेहतर होने से, यहां स्थापित होने वाले उद्योगों को अपना तैयार माल (Finished Goods) सीधे दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भारी आसानी होगी। कच्चा माल लाने और माल ढुलाई की लागत (Logistics Cost) में भारी कमी आएगी।
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​11,544 करोड़ के MoU: विकास और रोजगार का नया सवेरा

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​बिजनौर जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल जमीन अधिग्रहित करना नहीं है, बल्कि यहां बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग हब तैयार करना है।
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    ​भारी भरकम निवेश: बिजनौर में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और अन्य माध्यमों से अब तक 11,544 करोड़ रुपये के एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।
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    ​मालन नदी के पास क्लस्टर: जिला प्रशासन ने तहसील सदर के मंडावर क्षेत्र में मालन नदी के बांये छोर पर भी औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव दिया था।
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    ​रोजगार के बंपर अवसर: इस कॉरिडोर में एग्रीकल्चर बेस्ड इंडस्ट्री (कृषि आधारित उद्योग), एमएसएमई (MSME), टेक्सटाइल, और वेयरहाउसिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियों के आने की उम्मीद है। कारखानों और लॉजिस्टिक्स पार्कों के निर्माण से बिजनौर, मेरठ और मुजफ्फरनगर के हजारों स्थानीय युवाओं को सीधा रोजगार मिलेगा।
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    ​पलायन पर लगेगी रोक: स्थानीय स्तर पर ही वर्ल्ड-क्लास रोजगार मिलने से युवाओं का महानगरों की ओर होने वाला पलायन रुकेगा।
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आगे की राह:

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यूपीडा और राजस्व विभाग की टीमें 10 गांवों की सर्वे रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। जैसे ही अंश निर्धारण और नक्शे (Map) का तकनीकी काम पूरा होता है, जिला प्रशासन विधिवत रूप से भूमि का अधिग्रहण (Land Acquisition) और किसानों को मुआवजे का वितरण शुरू कर देगा। बिजनौर के लिए यह गलियारा सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक समृद्धि का सबसे बड़ा दरवाजा साबित होगा।
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