उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गंगा नदी के प्रकोप से निपटने और बाढ़ के खतरे को स्थायी रूप से कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना तैयार की गई है। सिंचाई विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार, गंगा नदी में सिल्ट के टापू हटाकर लगभग सात किलोमीटर लंबा चैनल बनाया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य नदी की धारा को सीधा और गहरा करना है, जिससे पानी का बहाव बेहतर हो और रावली जैसे महत्वपूर्ण तटबंधों पर कटान का दबाव कम हो सके।READ ALSO:-बिजनौर: 'कहाँ हो तुम पूजा...' 17 साल के 'वनवास' के बाद सड़क पर उतरा सिरफिरा आशिक, पूरे शहर को लाल खतों से पाटा
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बाढ़ के खतरे ने उड़ा दी थी नींद

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बिजनौर में 8 दिसंबर 2025 वह तारीख थी, जब गंगा किनारे के गांवों से लेकर जिला मुख्यालय तक के लोगों की रातों की नींद उड़ गई थी। पहाड़ों पर भारी बरसात के कारण गंगा नदी पूरे वेग से बह रही थी और रावली तटबंध को तेजी से काट रही थी। यह डर सता रहा था कि तटबंध किसी भी पल टूट सकता है, जिससे गंगा का पानी कई गांवों और खेतों में भर सकता है।
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चमत्कारिक रूप से तटबंध टूटने से बच गया, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है। इसका मुख्य कारण गंगा की धारा के बीच में कई किलोमीटर तक बने सिल्ट (गाद) के टापू हैं।
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क्यों बने सिल्ट के टापू?
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गंगा नदी उत्तराखंड से बिजनौर जिले में प्रवेश करती है, जहां इसमें मालन और सोनाली जैसी नदियाँ भी समाहित होती हैं। ये नदियाँ अपने साथ खेतों में कटान की मिट्टी और भारी मात्रा में सिल्ट बहाकर लाती हैं। पानी तो आगे बह जाता है, लेकिन सिल्ट नदी की धारा में जमी रह जाती है। यह सिल्ट धीरे-धीरे नदी की धारा से भी ऊंचे टापू का रूप ले लेती है।
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इन टापुओं के कारण गंगा का पानी बीच की धारा छोड़कर धीरे-धीरे तटबंध की ओर शिफ्ट होता जा रहा है। पानी को खुलकर बहने की जगह नहीं मिल पाती, जिससे वह पीछे की ओर जोर मारता है और तटीय गांवों के खेतों में भर जाता है।
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कैसे होगा चैनल निर्माण का कार्य?

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इस खतरे से स्थायी रूप से निपटने के लिए सिंचाई विभाग पहली बार गंगा की मुख्य धारा में हस्तक्षेप करने जा रहा है। अधिशासी अभियंता-सिंचाई विभाग, ब्रजेश मौर्य ने बताया कि गंगा नदी में सिल्ट के टापू हटाकर चैनल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसे जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है।
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कार्य योजना इस प्रकार है:

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    सिल्ट हटाना: रावली से लेकर बैराज तक लगभग सात किलोमीटर के क्षेत्र में बड़ी मशीनों की सहायता से सिल्ट को हटाया जाएगा।
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    तटबंध मजबूती: हटाई गई सिल्ट को तटबंध की ओर डाला जाएगा, जिससे तटबंध की मजबूती बढ़ेगी।
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    धारा की गहराई: गंगा की मुख्य धारा को चार से पांच मीटर तक गहरा किया जाएगा।
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सिंचाई विभाग का मानना है कि धारा के बीच में कोई व्यवधान न होने पर पानी सरपट बहता चला जाएगा, जिससे नदी को खुलकर बहने की जगह मिलेगी और धारा तटबंध की ओर कटान नहीं करेगी।
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41 साल से साफ नहीं हुई सिल्ट

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बिजनौर में चौधरी चरण सिंह मध्य गंगा बैराज का निर्माण वर्ष 1984 में हुआ था। तब से लेकर आज तक गंगा की धारा में जमा सिल्ट को साफ नहीं किया गया है। उत्तराखंड से बहकर आई सिल्ट वर्षों से धारा के बीच में जमा होती गई, जिसके कारण गंगा का पानी बीच धारा को छोड़कर किनारों पर कटान करता रहा। यही कारण है कि आज गंगा की धारा पांच किलोमीटर से भी अधिक चौड़ी हो चुकी है।
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बिजनौर में गंगा नदी में सिल्ट के टापू हटाकर 7 किलोमीटर लंबा चैनल बनाने की यह परियोजना नदी के व्यवहार को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल से न केवल रावली तटबंध पर कटान का खतरा कम होगा, बल्कि तटीय गांवों को भी हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है। यांत्रिकी खंड द्वारा इस कार्य को जल्दी ही शुरू किया जाएगा।
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