उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कुदरत का कहर लगातार जारी है। पर्वतीय क्षेत्रों (Hills) में हो रही लगातार भारी बारिश के कारण मैदानी इलाकों की नदियां उफान पर हैं, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। ताजा मामला बिजनौर (Bijnor) जिले से सामने आया है, जहां उफनती गंगा नदी का पानी अब रिहायशी इलाकों और मुख्य मार्गों पर तांडव मचा रहा है।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में पुलिस का बड़ा एक्शन: प्रेमिका के पति के चेहरे पर गंडासे से किए थे 17 वार, 24 घंटे में ही एनकाउंटर में लंगड़ा हुआ खूंखार कातिल हाशिम
\r\n\r\n\r\n\r\n
बिजनौर के चांदपुर और खादर इलाके में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। बाढ़ का पानी स्टेट हाईवे तक पहुंच चुका है, जिसके चलते यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। आइए, इस आपदा और जमीनी हालात की पूरी तस्वीर को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\nस्टेट हाईवे पर पहुंचा पानी, पांडवनगर पुलिस चौकी भी जलमग्न
\r\n\r\nगंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने के बाद इसका पानी अब मैदानी बस्तियों और सड़कों को अपनी चपेट में ले रहा है। चांदपुर के खादर इलाके की मुख्य सड़कों पर कई-कई फीट पानी बह रहा है, जिससे वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
\r\n\r\n
\r\n\r\nपानी के बढ़ते दबाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांडवनगर पुलिस चौकी के अंदर भी बाढ़ का पानी घुस गया है। सुरक्षा और एहतियात के तौर पर इस पुलिस चौकी को तुरंत खाली कराना पड़ा है। वर्तमान में इस चौकी के चारों तरफ 3 से 4 फीट पानी जमा हुआ है, जिसके कारण पुलिसकर्मियों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हाईवे पर पानी आने के कारण कई रूटों पर ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा है या गाड़ियों की रफ्तार थम गई है।
\r\n\r\n
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp
Join ›
\r\n\r\nटापू बने घर: पिछले 11 दिनों से 12 गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
\r\n\r\nबिजनौर के खादर क्षेत्र के लोगों के लिए पिछले 11 दिन किसी भयानक सपने से कम नहीं बीते हैं। इन 11 दिनों से लगातार 12 गांवों पर बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति यह हो चुकी है कि जलीलपुर-फैलपुर मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
गंगा खादर क्षेत्र में जिन लोगों ने अपने डेरे या मकान बना रखे हैं, उनके घर चारों तरफ से पानी से घिर चुके हैं। दूर से देखने पर ये बस्तियां अब छोटे-छोटे 'टापू' जैसी नजर आती हैं। कई ग्रामीण इलाकों और रास्तों पर कमर तक पानी भरा हुआ है, जिसके कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना भी दूभर हो गया है। दैनिक जीवन की बुनियादी चीजें जैसे दूध, राशन और दवाइयों के लिए भी लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
तहसील मुख्यालय से टूटा संपर्क, ट्रैक्टर-ट्रॉली बना आवागमन का एकमात्र साधन
\r\n\r\nबाढ़ और पानी के सैलाब के कारण बिजनौर के कई प्रमुख गांवों का संपर्क सीधे तौर पर तहसील मुख्यालय से पूरी तरह कट चुका है। जिन गांवों की स्थिति सबसे ज्यादा दयनीय है, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
- \r\n
- \r\n जलालपुर खादर\r\n \r\n
- \r\n मीरापुर सीकरी\r\n \r\n
- \r\n रायपुर खादर\r\n \r\n
- \r\n सलेमपुर\r\n \r\n
- \r\n दत्तियाना\r\n \r\n
- \r\n जमालुद्दीनपुर\r\n \r\n
- \r\n फैजीपुर\r\n \r\n
\r\n\r\n
इन तमाम गांवों के रास्ते पानी में डूब चुके हैं। मोटर साइकिल, कार या साइकिल जैसे साधन इन रास्तों पर पूरी तरह फेल हो चुके हैं। ऐसे में ग्रामीणों के पास आवागमन के लिए केवल ट्रैक्टर-ट्रॉली ही एकमात्र ऐसा साधन बचा है, जिसके जरिए लोग किसी तरह पानी को पार करके सुरक्षित स्थानों या जरूरी कामों के लिए आ-जा पा रहे हैं।
\r\n\r\n 
प्रशासन की सक्रियता: 4 राहत चौकियां और मोटरबोट तैनात
\r\n\r\nहालात की नजाकत को देखते हुए जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों (Relief and Rescue Operations) को युद्ध स्तर पर तेज कर दिया गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
एसडीएम (SDM) प्रशांत वर्मा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन ने प्रभावित इलाकों की मॉनिटरिंग और मदद के लिए चार बाढ़ राहत चौकियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। ये चौकियां निम्नलिखित स्थानों पर बनाई गई हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n खानपुर खादर\r\n \r\n
- \r\n बलिया नंगली\r\n \r\n
- \r\n पाडला\r\n \r\n
- \r\n बसंतपुर\r\n \r\n
\r\n\r\n
इन चौकियों पर तैनात प्रशासनिक टीमें लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं और ग्रामीणों की हर संभव मदद करने का प्रयास कर रही हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
बचाव के लिए मोटरबोट की व्यवस्था: पानी के बीच फंसे लोगों को निकालने और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने पर्याप्त साधन जुटाए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में कुल तीन मोटरबोट तैनात की गई हैं, जिनमें दो छोटी (तीन-सीटर) मोटरबोट और एक बड़ी 25-सीटर मोटरबोट शामिल हैं। एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि यदि जलस्तर और अधिक बढ़ता है या किसी गांव में लोग पूरी तरह घिर जाते हैं, तो इन मोटरबोटों का इस्तेमाल करके तुरंत लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पहाड़ों से आ रहे पानी और लगातार होती बारिश के कारण बिजनौर का खादर इलाका इस समय प्रकृति के प्रकोप का सामना कर रहा है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और राहत सामग्रियां पहुंचाई जा रही हैं, फिर भी स्थानीय नागरिकों को पूरी सावधानी बरतने की आवश्यकता है। नदी के उफनते बहाव के पास जाने से बचने और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने से ही इस आपदा के जोखिम को कम किया जा सकता है।



Sabse pehle comment karne wale banein.