बिजनौर (उत्तर प्रदेश): पहाड़ों पर हो रही लगातार मूसलाधार बारिश का सीधा और भयानक असर अब मैदानी इलाकों में देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में बहने वाली जीवनदायिनी गंगा नदी इस समय अपने पूरे रौद्र रूप में है। पिछले चार दिनों से गंगा के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि ने जिले के तटीय और खादर क्षेत्रों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि चांदपुर का खादर क्षेत्र पूरी तरह से टापू में तब्दील होता नजर आ रहा है।READ ALSO:-"पहले फोन कर दुकान पर बुलाया, फिर भूखे भेड़ियों की तरह टूट पड़े गुंडे..." मुजफ्फरनगर में दिनदहाड़े युवक की बेरहमी से पिटाई, खौफनाक CCTV वीडियो वायरल
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प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कई कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन पानी का बहाव और जलभराव का बढ़ता दायरा ग्रामीणों के लिए हर गुजरते पल के साथ नई मुश्किलें खड़ी कर रहा है। आइए, बिजनौर में बाढ़ के इस मंडराते खतरे, ग्रामीणों की मुश्किलों और प्रशासन की तैयारियों को विस्तार से समझते हैं।
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स्टेट हाईवे बना दरिया: 3 फीट पानी, यातायात पूरी तरह ठप
\r\n\r\nगंगा नदी के उफान का सबसे बड़ा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ा है। बिजनौर को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों में से एक, बहसूमा-ठाकुरद्वारा स्टेट हाईवे पर बाढ़ का पानी आ गया है। जानकारी के अनुसार, नारनौर गांव के पास इस हाईवे पर करीब तीन फीट तक पानी बह रहा है। पानी के तेज बहाव और लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की है।
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दुर्घटनाओं को टालने के लिए प्रशासन ने नारनौर गांव के पास बैरिकेडिंग कर दी है और इस स्टेट हाईवे को पूरी तरह से बंद कर दिया है। हालांकि, विडंबना यह है कि बैरिकेडिंग और प्रशासन की सख्त चेतावनी के बावजूद कुछ लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर तेज बहाव के बीच से आवाजाही कर रहे हैं। प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे पानी के बीच से वाहन निकालने का दुस्साहस न करें, क्योंकि जलस्तर का कोई भरोसा नहीं है और तेज बहाव किसी भी वाहन को अपने साथ बहा ले जा सकता है।
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12 गांवों पर मंडराया मौत और तबाही का साया, घरों में घुसा पानी
\r\n\r\nबाढ़ का यह पानी अब केवल खेतों और सड़कों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह रिहायशी इलाकों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा का पानी कई किलोमीटर के दायरे में फैल चुका है।
\r\n\r\nमिली जानकारी के अनुसार, चांदपुर खादर क्षेत्र के करीब 12 गांवों पर बाढ़ का सीधा खतरा मंडरा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित गांव शामिल हैं:
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- \r\n मीरापुर सीकरी\r\n \r\n
- \r\n स्याली\r\n \r\n
- \r\n रायपुर खादर\r\n \r\n
- \r\n नारनौर\r\n \r\n
- \r\n खानपुर खादर\r\n \r\n
- \r\n जमालुद्दीनपुर\r\n \r\n
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स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आधा दर्जन से अधिक गांवों में पानी लोगों के घरों की दहलीज पार कर अंदर घुस चुका है। लोग अपनी गृहस्थी का सामान समेटकर छतों या सुरक्षित ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
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जिंदगी की रफ्तार थमी: आवागमन का इकलौता सहारा बनी 'ट्रैक्टर-ट्रॉली'
\r\n\r\nबाढ़ प्रभावित गांवों की हालत यह है कि उनका संपर्क मुख्य शहरों और कस्बों से लगभग टूट चुका है। गांवों को जोड़ने वाले मुख्य संपर्क मार्गों (लिंक रोड) पर तीन-तीन फीट तक पानी भरा हुआ है। ऐसे में मोटरसाइकिल, कार या अन्य छोटे वाहन पूरी तरह से काम करना बंद कर चुके हैं।
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ग्रामीणों के लिए अब आपात स्थिति में गांव से बाहर निकलने या कोई भी जरूरी सामान लाने के लिए 'ट्रैक्टर-ट्रॉली' ही यातायात का एकमात्र और सबसे सुरक्षित साधन बची है। मरीजों को अस्पताल ले जाना हो या बाजार से कोई आवश्यक वस्तु लानी हो, हर काम के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली पर ही निर्भरता है।
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भोजन और पशुचारे का गहराता संकट: दोहरी मार झेल रहा किसान
\r\n\r\nजलभराव अगर कुछ और दिन इसी तरह बना रहा, तो ग्रामीणों के सामने एक और बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो सकता है। यह संकट है— खाद्यान्न और पशुओं के चारे का।
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\r\n\r\n\r\n"खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी हैं। पशुओं के लिए जो हरा चारा खेतों में था, वह सड़ने लगा है। घरों में रखा सूखा भूसा भी सीलन और पानी की चपेट में आ रहा है।"\r\n
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ग्रामीणों को अब अपने से ज्यादा अपने मवेशियों की चिंता सता रही है। पशुपालन खादर क्षेत्र के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। यदि जलस्तर में जल्द कमी नहीं आई, तो बाढ़ प्रभावित गांवों में खाने-पीने की सामग्री की भारी किल्लत हो सकती है। राशन की दुकानों और बाजारों तक पहुंच न होने के कारण यह चिंता और भी गहरी होती जा रही है।
\r\n\r\nप्रशासन अलर्ट मोड पर: ग्राउंड जीरो पर उतरे अधिकारी
\r\n\r\nहालात की नजाकत को समझते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
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चांदपुर के एसडीएम प्रशांत वर्मा ने खुद ग्राउंड जीरो पर उतरकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित मीरपुर सिकरी, नारनौर, रायपुर खादर, खानपुर खादर और जमालुद्दीनपुर जैसे गांवों का नाव और ट्रैक्टर के जरिए सघन निरीक्षण किया।
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एसडीएम प्रशांत वर्मा ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा:
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- \r\n सतर्कता ही बचाव है: ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे रात के समय विशेष सतर्कता बरतें।\r\n \r\n
- \r\n नदी किनारों से दूरी: बच्चों और पशुओं को किसी भी कीमत पर नदी के किनारों या तेज बहाव वाले पानी के पास न जाने दें।\r\n \r\n
- \r\n राहत केंद्र (Relief Camps) सक्रिय: प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बाढ़ राहत केंद्रों को सक्रिय कर दिया है। यदि पानी और बढ़ता है, तो लोगों को सुरक्षित इन राहत शिविरों में शिफ्ट किया जाएगा।\r\n \r\n
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इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली जलजनित बीमारियों (जैसे डायरिया, डेंगू, मलेरिया) से समय रहते निपटा जा सके।
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बिजनौर के चांदपुर खादर क्षेत्र की यह नियति बन चुकी है कि हर साल मानसून में गंगा का यह रौद्र रूप उन्हें झेलना पड़ता है। लेकिन इस बार पानी का उफान पिछले कुछ सालों की तुलना में अधिक आक्रामक नजर आ रहा है। फिलहाल, ग्रामीणों की निगाहें आसमान और प्रशासन की तैयारियों पर टिकी हैं। अगर बारिश का दौर थमता है और पहाड़ों से पानी कम छोड़ा जाता है, तो जल्द ही इन 12 गांवों के लोगों को इस भयानक जलभराव से मुक्ति मिल सकती है। तब तक के लिए, सतर्कता और प्रशासनिक दिशानिर्देशों का पालन ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.