उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। 3 जुलाई को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर की अध्यक्षता में जिला विद्यालय वाहन परिवहन सुरक्षा समिति की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बिजनौर स्कूली वाहन सुरक्षा और परिवहन मानकों के सही अनुपालन की गहन समीक्षा करना था। बच्चों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है, जिससे मानकविहीन और अवैध रूप से चल रहे स्कूली वाहन संचालकों में हड़कंप मच गया है।READ ALSO:-लखनऊ अग्निकांड का असर: मेरठ में एमडीए का चाबुक, स्टार प्लाजा में कोचिंग सेंटर सील; संचालकों में मचा भारी हड़कंप
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बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि बच्चों की जान के साथ किसी भी स्तर पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेकिंग अभियान तेज करने और नियमों को ताक पर रखकर वाहन चलाने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बैठक में स्कूली वाहनों की सुरक्षा के लिए क्या कड़े नियम और मानक तय किए गए हैं।
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बिजनौर स्कूली वाहन सुरक्षा को लेकर क्या हैं डीएम के सख्त निर्देश?

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शाम 4:00 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस बैठक के दौरान जिलाधिकारी जसजीत कौर ने जिले के शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को कड़े शब्दों में कहा कि वे जनपद के सभी सरकारी और प्राइवेट विद्यालयों में संचालित होने वाले चार पहिया स्कूली वाहनों की सघन चेकिंग सुनिश्चित करें।
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इस विशेष जांच अभियान में स्कूली वाहनों की फिटनेस (Vehicle Fitness), वैध दस्तावेज (Valid Documents) और सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की जानी चाहिए। डीएम ने साफ किया कि यदि जांच में कोई भी वाहन मानकों के विपरीत या अनफिट पाया जाता है, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से नोटिस जारी किया जाए। शिक्षा विभाग को परिवहन विभाग के साथ मिलकर समन्वय स्थापित करने और संयुक्त रूप से कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है।
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अनफिट वाहनों को मिलेगा नोटिस, फिर होगी सीधी कार्रवाई

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प्रशासन की यह सख्ती केवल नोटिस भेजने तक सीमित नहीं रहने वाली है। जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया है कि यदि नोटिस मिलने के बाद भी कोई स्कूल प्रबंधन या वाहन संचालक अनफिट और असुरक्षित वाहनों का संचालन करता हुआ पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर और तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
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ऐसे अनफिट वाहनों का संचालन पूरी तरह से रद्द कर दिया जाएगा और उन्हें सीज (Seize) करने की कार्रवाई भी परिवहन विभाग द्वारा की जाएगी। डीएम जसजीत कौर ने जोर देकर कहा कि किसी भी स्थिति में असुरक्षित स्कूली वाहनों का संचालन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस आदेश के बाद आने वाले दिनों में जिलेभर में सघन चेकिंग अभियान चलाए जाने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है, जिससे नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर लगाम कसी जा सकेगी।
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स्कूली वाहनों में इन सुरक्षा उपकरणों का होना है अनिवार्य

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स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग ने कुछ कड़े नियम बनाए हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के आधार पर तैयार किया गया है। डीएम ने अपनी बैठक में इन मानकों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है। बिजनौर स्कूली वाहन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक स्कूली वाहन (बस, वैन या अन्य चार पहिया वाहन) में निम्नलिखित उपकरणों का होना अनिवार्य किया गया है:
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    सीसीटीवी कैमरा (CCTV Camera): बच्चों की गतिविधियों और सुरक्षा निगरानी के लिए वाहन के अंदर कैमरे हमेशा चालू हालत में होने चाहिए।
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    फर्स्ट-एड बॉक्स (First-Aid Box): आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक उपचार के लिए सभी जरूरी दवाइयों और पट्टियों के साथ एक मेडिकल किट का होना अनिवार्य है।
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    अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher): आगजनी या शार्ट-सर्किट जैसी घटनाओं से बचाव के लिए वाहन में मान्यता प्राप्त और वर्किंग कंडीशन में फायर एक्सटिंग्विशर होना चाहिए।
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    आपातकालीन निकास (Emergency Exit): किसी भी दुर्घटना के समय बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बस में इमरजेंसी गेट (निकास द्वार) काम करने की स्थिति में होना चाहिए और उसके आगे कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।
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    जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम (GPS Tracking System): वाहन की लाइव लोकेशन ट्रैक करने के लिए जीपीएस डिवाइस का लगा होना जरूरी है, ताकि अभिभावक और स्कूल प्रबंधन वाहन की लोकेशन जान सकें।
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चालक और परिचालक (Attendant) के लिए कड़े नियम

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सुरक्षा उपकरणों के साथ-साथ वाहन चलाने वाले स्टाफ की जिम्मेदारी भी सबसे अहम होती है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि वाहन चालक (Driver) के पास वैध कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए और उसके पास स्कूली वाहन चलाने का निर्धारित अनुभव होना आवश्यक है।
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इसके अलावा, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चालक का पुलिस सत्यापन (Police Verification) अनिवार्य रूप से कराया गया हो, ताकि उसका कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड न हो। ड्राइवर के साथ-साथ बस या वैन में एक परिचालक (Attendant/Helper) की उपलब्धता भी हर हाल में सुनिश्चित की जाए। यह अटेंडेंट बच्चों को सुरक्षित रूप से बस में चढ़ाने, उतारने और सड़क पार कराने में मदद करेगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर स्कूल के साथ-साथ वाहन संचालक के विरुद्ध भी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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प्रशासन की निगरानी और अभिभावकों की भूमिका

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सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी दशा में स्वीकार नहीं की जाएगी। इस अहम बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रणविजय सिंह, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO), जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, पुलिस विभाग के आला अधिकारी, परिवहन विभाग के अधिकारी और विभिन्न प्राइवेट विद्यालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी को यह कड़ा संदेश दे दिया गया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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प्रशासन के साथ-साथ अभिभावकों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है। अभिभावकों को यह जांचना चाहिए कि जिस बस या वैन में उनके बच्चे यात्रा कर रहे हैं, क्या वह पीले रंग से पुती है, उस पर 'स्कूल बस' लिखा है और सभी मानकों को पूरा कर रही है या नहीं। यदि उन्हें किसी प्रकार की खामी नजर आती है, तो उन्हें तुरंत स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों से शिकायत करनी चाहिए।
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बिजनौर जिला प्रशासन द्वारा 3 जुलाई को स्कूली वाहनों की सुरक्षा के लिए उठाया गया यह कदम बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद अहम है। बिजनौर स्कूली वाहन सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में हुई बैठक से यह स्पष्ट हो गया है कि शिक्षा और परिवहन विभाग अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। सीसीटीवी, जीपीएस और फर्स्ट-एड जैसी सुविधाओं को अनिवार्य करने के साथ-साथ अनफिट वाहनों के संचालन पर रोक लगाने की चेतावनी से व्यवस्था में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन कड़े निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितनी ईमानदारी और सख्ती के साथ पालन सुनिश्चित किया जाता है, ताकि बच्चों की यात्रा पूरी तरह से सुरक्षित और जोखिम मुक्त हो सके।
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