खबरीलाल (Khabreelal) विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: बिजनौर: "बेटियां बोझ नहीं, बल्कि समाज का गौरव और कल का उज्ज्वल भविष्य हैं।" इसी सोच को धरातल पर उतारने और समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण (Positive Attitude) को बढ़ावा देने के लिए बिजनौर के जिला महिला अस्पताल में एक बेहद भावुक और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में खूनी खेल: संपत्ति का विवाद या शराब का नशा? सगे छोटे भाई ने ली बड़े भाई की जान, पुलिस की थ्योरी ने उलझाई गुत्थी
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अक्सर अस्पतालों में बच्चों के जन्म पर सामान्य प्रक्रियाएं ही देखने को मिलती हैं, लेकिन शुक्रवार का दिन बिजनौर के जिला अस्पताल के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं था। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' (Beti Bachao, Beti Padhao) के तहत यहां 16 नवजात कन्याओं का भव्य जन्मोत्सव मनाया गया।
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इस अवसर पर बिजनौर की जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और नवजात बच्चियों की माताओं को बेबी किट (Baby Kit), उपहार और मिठाइयां भेंट कर सम्मानित किया। आइए, खबरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं इस अनूठे कार्यक्रम की पूरी झलक और महिलाओं को जागरूक करने के लिए दिए गए अहम संदेश।
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अस्पताल में कटा केक, तालियों की गूंज के बीच मना जन्मोत्सव
\r\n\r\nशुक्रवार दोपहर ठीक 12 बजे जिला महिला अस्पताल के प्रांगण में इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में कन्या भ्रूण हत्या (Female Feticide) जैसे जघन्य अपराध को जड़ से खत्म करना और बेटियों के जन्म को एक उत्सव के रूप में स्थापित करना था।
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कार्यक्रम में जिलाधिकारी जसजीत कौर के अलावा जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) और जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका (CMS) डॉ. प्रभा रानी भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
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डीएम जसजीत कौर ने अस्पताल के वार्ड में जाकर उन 16 माताओं से मुलाकात की, जिन्होंने हाल ही में बेटियों को जन्म दिया है। उन्होंने अपने हाथों से माताओं को:
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- \r\n नवजात बेबी किट (Baby Care Kits)\r\n \r\n
- \r\n पौष्टिक आहार और मिठाइयां\r\n \r\n
- \r\n बधाई पत्र (Congratulatory Letters) सौंपे।\r\n \r\n
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कार्यक्रम के अंत में अस्पताल प्रशासन, उपस्थित चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और माताओं की मौजूदगी में एक बड़ा सा केक काटकर इन 16 नन्ही परियों का जन्मोत्सव मनाया गया। अस्पताल का पूरा माहौल उस वक्त खुशी और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
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'बेटियां समाज की नींव हैं, वे बेटों से कम नहीं': DM जसजीत कौर
\r\n\r\nउपस्थित माताओं और उनके परिवार वालों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी जसजीत कौर ने एक बेहद ओजस्वी और प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समय बदल चुका है और आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं।
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\r\n\r\n\r\n"बेटियां हमारे समाज की नींव हैं। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, खेल का मैदान हो, प्रशासनिक सेवाएं हों या फिर अंतरिक्ष विज्ञान, हर जगह हमारी बेटियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। एक बेटी के जन्म पर मातम नहीं, बल्कि उत्सव मनाया जाना चाहिए। जब हम एक बेटी को शिक्षित और सशक्त बनाते हैं, तो हम केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि दो परिवारों और आने वाली पूरी पीढ़ी को सशक्त बनाते हैं।" - जसजीत कौर, जिलाधिकारी, बिजनौर\r\n
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डीएम ने बालिकाओं को समान अवसर (Equal Opportunities) और अधिकार प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने माताओं को सलाह दी कि वे अपनी बेटियों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा को लेकर हमेशा जागरूक रहें और समाज की पुरानी रूढ़िवादी सोच को तोड़ें।
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'कन्या सुमंगला योजना': बेटियों के जन्म से लेकर पढ़ाई तक का खर्च
\r\n\r\nकार्यक्रम में केवल उपहार ही नहीं बांटे गए, बल्कि महिलाओं को उनके हकों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक भी किया गया। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने महिला कल्याण विभाग द्वारा चलाई जा रही सबसे अहम 'मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना' (Kanya Sumangala Yojana) की विस्तृत जानकारी दी।
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क्या है यह योजना? (खबरीलाल इन्फो डेस्क) अक्सर गरीब परिवारों में बेटी के जन्म पर उसकी पढ़ाई और शादी के खर्च की चिंता सताने लगती है। इसी चिंता को दूर करने के लिए यूपी सरकार यह योजना चला रही है। इस योजना के तहत बेटी के जन्म से लेकर उसके स्नातक (Graduation) की पढ़ाई तक अलग-अलग चरणों में सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
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- \r\n अधिकारियों ने बताया कि पात्र लाभार्थी अस्पताल में ही इसके लिए फॉर्म भर सकते हैं या जन सेवा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, ताकि बेटी के जन्म के साथ ही उसके सुरक्षित भविष्य की नींव रखी जा सके।\r\n \r\n
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नवजात शिशु की देखभाल: CMS डॉ. प्रभा रानी की अहम सलाह
\r\n\r\nजिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका (CMS) डॉ. प्रभा रानी ने स्वास्थ्य के नजरिए से माताओं को बेहद जरूरी बातें बताईं। उन्होंने कहा कि एक नवजात बच्ची के लिए शुरुआती 1000 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
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उन्होंने माताओं को मुख्य रूप से तीन बातों पर विशेष ध्यान देने को कहा:
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- \r\n स्तनपान (Breastfeeding) का महत्व: शिशु के जन्म के पहले एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे के लिए किसी अमृत या पहले टीके से कम नहीं है। यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है। पहले 6 महीने बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n नियमित टीकाकरण (Immunization): बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य कार्ड (Health Card) के अनुसार बच्ची का समय-समय पर टीकाकरण कराना अनिवार्य है। अस्पताल में यह सुविधा पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध है।\r\n \r\n
- \r\n साफ-सफाई: नवजात को संक्रमण से बचाने के लिए मां को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।\r\n \r\n
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डॉ. प्रभा रानी ने अस्पताल प्रशासन द्वारा सुरक्षित प्रसव (Safe Delivery) और जच्चा-बच्चा देखभाल के लिए दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से बताया।
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बदल रहा है बिजनौर का समाज
\r\n\r\nबिजनौर जिला प्रशासन की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि केवल कानूनों से नहीं, बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाकर ही 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के सपने को साकार किया जा सकता है। जब जिले की मुखिया (DM) खुद अस्पताल पहुंचकर बेटियों का जन्मोत्सव मनाती हैं, तो यह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक एक कड़ा और स्पष्ट संदेश भेजता है कि "बेटियां अनमोल हैं।"
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Sabse pehle comment karne wale banein.