प्यार जब जिद और सनक में बदल जाता है, तो वह केवल विनाश का कारण बनता है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) से एक ऐसा ही सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे शहर को खौफ के साए में धकेल दिया है। एक 18 साल की मासूम लड़की, जिसकी आंखों में अगले महीने होने वाली अपनी शादी के अनगिनत सुनहरे सपने थे, उसे उसके ही अतीत ने इतनी भयानक मौत दी कि सुनने वालों की रूह कांप जाए। बिजनौर शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कांशीराम कॉलोनी में मंगलवार की शाम जो कुछ भी हुआ, वह किसी खौफनाक क्राइम थ्रिलर फिल्म की कहानी से कम नहीं है।READ ALSO:-मेरठ का बहुचर्चित 'नीला ड्रम कांड': 13 महीने बाद 6 महीने की बच्ची गोद में लेकर कोर्ट पहुंची कातिल पत्नी मुस्कान, प्रेमी साहिल से भी हुए सवाल-जवाब; मां बोली- 'दोनों को फांसी दो'
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जिस घर में कुछ ही दिनों बाद शहनाइयां बजने वाली थीं, मांगलिक गीत गाए जाने वाले थे और हल्दी-मेहंदी की रस्में होने वाली थीं, आज उस घर के फर्श पर सिर्फ और सिर्फ खून बिखरा पड़ा है। एक शादीशुदा युवक ने अपने एकतरफा और सनकी प्यार के चलते न केवल एक हंसते-खेलते परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया, बल्कि खुद की भी जान लेने की खौफनाक कोशिश की। इस घटना ने एक बार फिर समाज में महिलाओं की सुरक्षा, पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और बिगड़ती मानसिकता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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लड़की के सीने पर चाकू से 5 से 6 वार के निशान मिले हैं।

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कौन थी कशिश और कैसे रची गई मौत की यह खौफनाक पटकथा?

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इस पूरे दर्दनाक घटनाक्रम को समझने के लिए सबसे पहले हमें पीड़ित परिवार की पृष्ठभूमि को जानना होगा। बिजनौर की शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित कांशीराम कॉलोनी के ब्लॉक नंबर-55 के कमरा नंबर 656 में शाहीन नाम की एक महिला अपनी दो बेटियों के साथ रहती है। शाहीन के पति जाकिर परिवार के भरण-पोषण के लिए दिल्ली में रहकर मजदूरी और काम-काज करते हैं।
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शाहीन की बड़ी बेटी का नाम कशिश था, जिसकी उम्र महज 18 साल थी। कशिश शहर के ही एक स्कूल में 12वीं कक्षा (इंटरमीडिएट) की होनहार छात्रा थी। वह पढ़ने-लिखने में अच्छी थी और परिवार का हर सदस्य उससे बेहद प्यार करता था। माता-पिता ने कशिश के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से उसका रिश्ता तय कर दिया था। परिवार में खुशी का माहौल था क्योंकि ठीक अगले महीने कशिश की शादी होने वाली थी। घर में शादी की तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही थीं। मेहमानों की लिस्ट बन रही थी और बाजार से सामान लाए जा रहे थे।
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इसी शादी की तैयारियों के सिलसिले में मंगलवार की सुबह कशिश की मां शाहीन अपनी बहन के घर अंबाला (हरियाणा) के लिए रवाना हुई थी। उनका मकसद वहां जाकर अपनी लाडली बेटी के लिए शादी का खास सामान, कपड़े और शायद कुछ जेवर खरीदना था। मां के जाने के बाद घर में कशिश अकेली थी, जबकि उसके पिता जाकिर अपने काम पर दिल्ली में मौजूद थे। कातिल ने इसी अकेलेपन का फायदा उठाने के लिए मंगलवार के दिन को चुना।
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युवक ने भी अपने गले पर चाकू से वार किया, जिससे वह भी गंभीर रूप से घायल हो गया।

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मंगलवार शाम 4 से 5 बजे का वह मनहूस वक्त: जब दरवाजे पर दस्तक दी मौत ने

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मां के अंबाला जाने के बाद कशिश घर के कामकाज निपटा रही थी। शाम के करीब 4 से 5 बजे के बीच का समय था। कांशीराम कॉलोनी में रोजमर्रा की तरह चहल-पहल थी, लेकिन किसी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि ब्लॉक नंबर-55 के एक बंद दरवाजे के पीछे एक खौफनाक साजिश आकार ले रही है।
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तभी कशिश के घर के दरवाजे पर दस्तक हुई। दरवाजा खटखटाने वाला कोई और नहीं, बल्कि उसका एक्स-बॉयफ्रेंड (पूर्व प्रेमी) राहुल था। गोकलपुर गांव का रहने वाला राहुल पहले से ही शादीशुदा है और अपना घर बसा चुका है। पड़ोसियों और पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, राहुल और कशिश के बीच पहले से कोई संबंध रहा था, लेकिन राहुल के शादीशुदा होने और कशिश की शादी कहीं और तय हो जाने के कारण कशिश ने इस रिश्ते को पूरी तरह से खत्म कर दिया था। वह अपने नए जीवन की शुरुआत करना चाहती थी।
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जब राहुल ने दरवाजा खटखटाया, तो कशिश ने शायद बात को हमेशा के लिए खत्म करने या उसे समझाने के इरादे से दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलते ही राहुल जबरन घर के अंदर दाखिल हो गया।
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सीने में उतारे 6 चाकू, चीखों से गूंज उठी कांशीराम कॉलोनी

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घर के अंदर घुसते ही राहुल ने कशिश की तय हुई शादी को लेकर बखेड़ा खड़ा कर दिया। वह इस बात को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने को तैयार नहीं था कि कशिश किसी और की पत्नी बने। एक शादीशुदा पुरुष होने के बावजूद, उसकी सनक इस कदर हावी थी कि वह कशिश को अपनी 'जागीर' समझ बैठा था।
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दोनों के बीच इस बात को लेकर तीखी बहस और झगड़ा शुरू हो गया। कशिश ने राहुल को घर से बाहर जाने को कहा, लेकिन राहुल पूरी तैयारी के साथ आया था। उसने अपनी जेब से एक धारदार और खतरनाक चाकू निकाला। इससे पहले कि कशिश कुछ समझ पाती या अपनी जान बचाकर भागने की कोशिश करती, राहुल ने एक दरिंदे की तरह उस पर हमला कर दिया।
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राहुल ने पूरी ताकत और क्रूरता के साथ कशिश के सीने (Chest) पर एक के बाद एक चाकू के कई ताबड़तोड़ वार किए। पुलिस और मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, कशिश के सीने पर 5 से 6 गहरे वार किए गए। हर वार के साथ कशिश की दर्दनाक चीखें निकल रही थीं। इन चीखों ने कांशीराम कॉलोनी के सन्नाटे को चीर दिया।
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दरवाजा बंद कर खुद की गर्दन रेती: पड़ोसियों की आंखों देखा खौफनाक मंजर

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कशिश की चीख-पुकार सुनकर आसपास के पड़ोसी बुरी तरह घबरा गए। कशिश के पड़ोसी मुस्तकीम ने मीडिया और पुलिस को घटना की आंखों देखी जानकारी देते हुए बताया कि जब वे लोग दौड़कर कमरा नंबर 656 के बाहर पहुंचे, तो अंदर से भयानक आवाजें आ रही थीं।
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मुस्तकीम और अन्य पड़ोसियों ने दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आ रहा था। दरअसल, कशिश को मौत के घाट उतारने के बाद जब राहुल को यह अहसास हुआ कि बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई है और वह अब बचकर नहीं भाग सकता, तो उसने अंदर से दरवाजे की मजबूत कुंडी लगा ली।
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अपने किए जुर्म की भयावहता को देखकर और पुलिस के खौफ से, इस सिरफिरे आशिक ने उसी खून से सने चाकू से अपनी खुद की गर्दन भी बुरी तरह रेत ली। वह कशिश की लाश के पास ही तड़पता हुआ गिर पड़ा। पड़ोसियों ने जब देखा कि दरवाजा नहीं खुल रहा है और अंदर सन्नाटा छा गया है, तो उन्होंने बिना एक पल की देरी किए स्थानीय पुलिस कंट्रोल रूम को इस खौफनाक घटना की सूचना दी।
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पुलिस का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना और वह वीभत्स दृश्य

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सूचना मिलते ही बिजनौर कोतवाली शहर की पुलिस भारी दलबल के साथ सायरन बजाती हुई कांशीराम कॉलोनी पहुंच गई। पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पड़ोसियों की मदद से दरवाजे को जोर से धक्का मारकर तोड़ दिया।
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जैसे ही दरवाजा टूटा और पुलिसकर्मी घर के अंदर दाखिल हुए, वहां का नजारा देखकर अच्छे-अच्छे पुलिस वालों के भी होश उड़ गए। पूरा कमरा एक बूचड़खाने में तब्दील हो चुका था। फर्श, दीवारें और सामान खून से रंगे हुए थे। कमरे के बीचों-बीच आरोपी प्रेमी राहुल खून से लथपथ हालत में पड़ा हुआ था। उसकी गर्दन बुरी तरह कटी हुई थी और वह दर्द से कराह रहा था।
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वहीं, घर की किचन (रसोई) के पास 18 साल की मासूम कशिश की लाश पड़ी हुई थी। उसके सीने से लगातार खून बह रहा था और उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी। पुलिस ने बिना समय गंवाए दोनों को तुरंत उठाकर एंबुलेंस के जरिए बिजनौर के सरकारी अस्पताल (जिला चिकित्सालय) पहुंचाया।
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अस्पताल में कशिश को मृत घोषित किया गया, राहुल जिंदगी और मौत के बीच

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जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम ने तुरंत दोनों का परीक्षण किया। अत्यधिक खून बह जाने और सीने में गहरे घाव होने (महत्वपूर्ण अंगों के कट जाने) के कारण कशिश की जान रास्ते में ही जा चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
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वहीं दूसरी ओर, कातिल राहुल की गर्दन की नसें कटने के कारण उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। डॉक्टरों ने तुरंत उसे प्राथमिक उपचार दिया और उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे सघन चिकित्सा कक्ष (ICU) या हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया है, जहां उसका इलाज लगातार जारी है। पुलिस ने राहुल की निगरानी के लिए अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि उसके होश में आने पर उसे तुरंत गिरफ्तार कर हत्या के आरोप में जेल भेजा जा सके।
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पुलिस ने कशिश के शव को अपने कब्जे में लेकर पंचायतनामा (Inquest) की कार्रवाई पूरी की और उसे पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इस बात का सटीक खुलासा होगा कि कशिश के शरीर पर चाकुओं के कितने वार किए गए थे और उसकी मौत का सटीक कारण क्या रहा।
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पुलिस पर उठे गंभीर सवाल: "अगर पहले एक्शन लिया होता, तो आज कशिश जिंदा होती"

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इस हत्याकांड में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला खुलासा पड़ोसियों और परिवार के करीबियों ने किया है। पड़ोसी मुस्तकीम ने स्पष्ट रूप से बताया कि यह मामला एक दिन की सनक का नहीं था।
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जानकारी के अनुसार, आरोपी राहुल लंबे समय से कशिश को परेशान कर रहा था। कशिश का परिवार उसके इस रवैये से बेहद तंग आ चुका था। मुस्तकीम ने दावा किया कि इस खौफनाक वारदात से पहले भी लड़की के परिवार वालों (माता-पिता) ने इस शादीशुदा लड़के (राहुल) के खिलाफ स्थानीय थाने में शिकायत (रिपोर्ट) दर्ज कराई थी।
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पड़ोसियों का साफ तौर पर कहना है, "अगर पुलिस ने उस समय परिवार की शिकायत को गंभीरता से लिया होता और आरोपी राहुल के खिलाफ सख्त एक्शन लिया होता, तो आज उसकी इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह दिनदहाड़े घर में घुसकर मर्डर कर दे। पुलिस की ढिलाई और लापरवाही ने ही आज एक 18 साल की बच्ची की जान ले ली।" इस खुलासे के बाद बिजनौर पुलिस बैकफुट पर नजर आ रही है और उच्च अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या पूर्व में दी गई शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने कोई लापरवाही बरती थी।
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अंबाला में मां को और दिल्ली में पिता को मिली मनहूस खबर

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इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू कशिश के माता-पिता की स्थिति है। जो मां अंबाला के बाजारों में अपनी बेटी की शादी के लिए लाल जोड़ा, गहने और मिठाइयां पसंद कर रही थी, जब उसके पास फोन की घंटी बजी और दूसरी तरफ से बेटी के कत्ल की मनहूस खबर मिली, तो उस मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। बताया जा रहा है कि खबर सुनते ही शाहीन बेसुध हो गई। वहीं दिल्ली में मजदूरी कर अपनी बेटी की शादी के लिए एक-एक पैसा जोड़ रहे पिता जाकिर की दुनिया भी पल भर में उजड़ गई। दोनों माता-पिता बदहवास हालत में बिजनौर के लिए रवाना हो चुके हैं। जिस घर में बेटी की डोली उठने की तैयारियां चल रही थीं, अब वहां से उसका जनाजा उठाने की तैयारी हो रही है।
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बिजनौर एसपी (SP) अभिषेक झा का आधिकारिक बयान

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इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद बिजनौर के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक झा ने खुद मामले की कमान संभाल ली है। उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और मीडिया को पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी दी।
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एसपी अभिषेक झा ने बताया, "बिजनौर कोतवाली शहर क्षेत्र की कांशीराम कॉलोनी में एक युवक और युवती के घायल अवस्था में मिलने की सूचना प्राप्त हुई थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों को अस्पताल पहुंचाया। घटना में युवती (कशिश) की हालत बेहद गंभीर थी, जिसके कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है। जबकि आरोपी युवक (राहुल) भी गंभीर रूप से घायल है और उसका अस्पताल में इलाज जारी है।"
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एसपी ने आगे जानकारी देते हुए पुष्टि की, "प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी युवक राहुल पहले से ही शादीशुदा है, लेकिन उसका मृतका कशिश के साथ लंबे समय से कोई रिलेशन (प्रेम प्रसंग) था। लड़की की कहीं और शादी तय होने से वह नाराज था। हमने मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून से सना चाकू और अन्य अहम सुबूत इकट्ठा कर लिए हैं। मामले में आरोपी के खिलाफ हत्या (धारा 302) और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर आवश्यक विधिक (कानूनी) कार्रवाई की जा रही है।"
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समाज के लिए एक डरावना सबक: कब थमेंगे ऐसे अपराध?

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बिजनौर का यह 'कांशीराम कॉलोनी हत्याकांड' हमारे समाज के लिए कई गंभीर सवाल छोड़ जाता है।
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    एक शादीशुदा पुरुष, जिसके खुद के परिवार की जिम्मेदारी उस पर है, वह किस हद तक अंधा हो सकता है कि किसी दूसरे की बेटी की बेरहमी से जान ले ले?
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    क्या हमारे समाज में 'न' (NO) सुनने की आदत पूरी तरह से खत्म हो गई है?
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    और सबसे बड़ा सवाल—क्या हमारी पुलिस व्यवस्था केवल तब जागती है जब कोई लाश जमीन पर गिर चुकी होती है?
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आज कशिश इस दुनिया में नहीं है। उसके सपनों, उसकी मुस्कान और उसके आने वाले सुनहरे कल को एक सनकी इंसान ने चाकुओं से गोदकर हमेशा के लिए खत्म कर दिया। अब देखना यह है कि क्या बिजनौर पुलिस इस मामले की फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराकर उस कातिल को फांसी के फंदे तक पहुंचा पाती है, या कशिश के गरीब माता-पिता न्याय के लिए सालों तक अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर होते हैं। फिलहाल, पूरे बिजनौर शहर में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश और शोक की लहर है।
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