01 सितंबर 2026 को माननीय न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश/एफ0टी0सी0 (फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट), जनपद बिजनौर द्वारा यह निर्णय सुनाया गया। कोर्ट ने मुख्य आरोपी राम सिंह को धारा 302 (हत्या), 393 (लूट का प्रयास) और 457 (रात्रि में गृह-अतिचार) के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
\r\n\r\nमामला और सजा का संक्षिप्त ब्योरा (Overview Table)
\r\n\r\n| \r\n विवरण \r\n | \r\n \r\n तथ्य/जानकारी \r\n | \r\n
|---|---|
| \r\n घटना का स्थान \r\n | \r\n \r\n थाना चांदपुर, जनपद बिजनौर \r\n | \r\n
| \r\n मुकदमा अपराध संख्या \r\n | \r\n \r\n 347/2018 \r\n | \r\n
| \r\n घटना/तहरीर की तिथि \r\n | \r\n \r\n 19 मई 2018 \r\n | \r\n
| \r\n फैसले की तिथि \r\n | \r\n \r\n 01 सितंबर 2026 \r\n | \r\n
| \r\n संबंधित न्यायालय \r\n | \r\n \r\n अपर सत्र न्यायाधीश / एफ0टी0सी0, जनपद बिजनौर \r\n | \r\n
| \r\n मुख्य अभियुक्त व सजा \r\n | \r\n \r\n राम सिंह: आजीवन कारावास एवं ₹50,000 अर्थदण्ड \r\n | \r\n
| \r\n अन्य सह-अभियुक्त \r\n | \r\n \r\n खेम सिंह उर्फ खिम्मा व बचराम उर्फ लीची: जेल में बिताई अवधि की सजा \r\n | \r\n
| \r\n पुलिस अभियान \r\n | \r\n \r\n "ऑपरेशन कन्विक्शन" (बिजनौर पुलिस व अभियोजन विभाग) \r\n | \r\n
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजनौर पुलिस ने गहन विवेचना शुरू की। पुलिस की विवेचनात्मक कार्यवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन के आधार पर तीन आरोपियों के नाम प्रकाश में आए। तीनों आरोपी जनपद शाहजहांपुर के रहने वाले पाए गए:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n राम सिंह पुत्र त्रिलोकी (निवासी: ग्राम रावतपुर, थाना सिंधौली, जनपद शाहजहांपुर)\r\n \r\n
- \r\n खेम सिंह उर्फ खिम्मा पुत्र टेकराम (निवासी: ग्राम मिलकिया, थाना निगोही, जनपद शाहजहांपुर)\r\n \r\n
- \r\n बचराम उर्फ लीची पुत्र लक्ष्मण (निवासी: ग्राम ईशापुर, थाना निगोही, जनपद शाहजहांपुर)\r\n \r\n
\r\n\r\nपुलिस ने विवेचना पूर्ण करते हुए तीनों अभियुक्तों के विरुद्ध पर्याप्त सबूत जुटाकर नियमानुसार माननीय न्यायालय में आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल किया।
\r\n\r\n'ऑपरेशन कन्विक्शन' और मॉनिटरिंग सेल की सशक्त पैरवी
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश में गंभीर और जघन्य अपराधों के अपराधियों को त्वरित सजा दिलाने के लिए राज्य स्तर पर "ऑपरेशन कन्विक्शन" की शुरुआत की गई है। इसी क्रम में जनपद बिजनौर में पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में स्थानीय पुलिस और मॉनिटरिंग सेल ने इस केस को प्राथमिकता पर रखा।
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n साक्ष्यों का संकलन: अभियोजन पक्ष द्वारा गवाहों को समय पर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।\r\n \r\n
- \r\n प्रभावी बहस: मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन अधिकारियों द्वारा वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों को मजबूती के साथ अदालत के समक्ष रखा गया।\r\n \r\n
- \r\n त्वरित सुनवाई: फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) में चली नियमित सुनवाई के दौरान अभियोजन ने यह साबित किया कि मुख्य अभियुक्त राम सिंह ने ही हत्या और अवैध घुसपैठ की वारदात को अंजाम दिया।\r\n \r\n
\r\n\r\n\r\n\r\n#BijnorPolice
\r\nथाना नूरपुर पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 302/2026 धारा 37(2)/65(1) बीएनएस व 3/4(2) पॉक्सो एक्ट से संबंधित एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया।#UPPolice pic.twitter.com/7yEbKWZTeI\r\n— BIJNOR POLICE (@bijnorpolice) September 1, 2026 🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →सभी ऑफर देखें →
न्यायालय का अंतिम निर्णय और सजा का ऐलान
\r\n\r\n01 सितंबर 2026 को जनपद बिजनौर के अपर सत्र न्यायाधीश/एफ0टी0सी0 न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अनुशीलन करने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी पाया।
\r\n\r\n1. राम सिंह (मुख्य दोषी) को सजा:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n धाराएं: 302, 393 और 457 भा0दं0सं0 (IPC)\r\n \r\n
- \r\n सजा: आजीवन कारावास (Life Imprisonment)\r\n \r\n
- \r\n अर्थदण्ड: कुल ₹50,000/- (पचास हजार रुपये) का जुर्माना\r\n \r\n
\r\n\r\n2. सह-अभियुक्तों (खेम सिंह और बचराम) को सजा:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n धाराएं: 393 और 457 भा0दं0सं0 (IPC)\r\n \r\n
- \r\n सजा: मुकदमे के दौरान जेल में बिताई गई अवधि (Period Already Undergone) को ही सजा के रूप में समायोजित किया गया।\r\n \r\n
\r\n\r\nकानूनी धाराओं का विश्लेषण (Understanding Law Sections)
\r\n\r\nन्यायालय द्वारा दोषियों को जिन धाराओं में सजा सुनाई गई है, उनका कानूनी अर्थ इस प्रकार है:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n धारा 302 IPC (हत्या): जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की जानबूझकर हत्या करता है, तो इस धारा के तहत मृत्युदंड या आजीवन कारावास तथा आर्थिक जुर्माने का प्रावधान होता है।\r\n \r\n
- \r\n धारा 393 IPC (लूट का प्रयास): यदि कोई व्यक्ति लूट की वारदात को अंजाम देने की कोशिश करता है लेकिन सफल नहीं हो पाता, तो इस धारा के तहत कठोर कारावास की सजा दी जाती है।\r\n \r\n
- \r\n धारा 394 IPC: किसी व्यक्ति द्वारा लूटपाट करने या लूट का प्रयास करने के दौरान किसी को जानबूझकर गंभीर नुकसान पहुंचाना या घायल करना।\r\n \r\n
- \r\n धारा 457 IPC (रात्रि में जबरन प्रवेश/गृह-अतिचार): रात के अंधेरे में किसी के घर में अपराध करने की नीयत से अवैध रूप से घुसना या ताला तोड़कर प्रवेश करना।\r\n \r\n
बिजनौर पुलिस का कड़ा संदेश
\r\n\r\nबिजनौर पुलिस और अभियोजन विभाग द्वारा की गई इस सफल पैरवी से पीड़ित परिवार ने न्याय की सांस ली है। लगभग 8 वर्षों से चले आ रहे इस कानूनी संघर्ष का अंत एक सख्त सजा के रूप में हुआ है। बिजनौर पुलिस प्रशासन ने इस फैसले के बाद संदेश दिया है कि जिले में किसी भी प्रकार के जघन्य अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के तहत कठोर पैरवी जारी रहेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.