बिजनौर (Bijnor): जनपद में यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने और वाहनों के पंजीकरण में होने वाली धांधली या देरी को रोकने के लिए परिवहन विभाग (Transport Department) अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। अक्सर देखा जाता है कि लोग नया वाहन खरीदते हैं और बिना नंबर प्लेट या रजिस्ट्रेशन के ही उसे सड़कों पर दौड़ाने लगते हैं। यह न केवल मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) का सीधा उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ी चूक है।READ ALSO:-ड्राइविंग करने वालों की बल्ले-बल्ले! ट्रैफिक नियमों में होने जा रहा है सबसे बड़ा बदलाव, अब पहली गलती पर 'चालान' नहीं, मिलेगी 'चेतावनी'
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इसी व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से बुधवार दोपहर दो बजे उप संभागीय परिवहन कार्यालय (ARTO Office) में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता एआरटीओ महेश शर्मा (ARTO Mahesh Sharma) ने की, जिसमें जिले भर के सभी प्रमुख दोपहिया (Two-wheelers) और चारपहिया (Four-wheelers) वाहन डीलरों ने हिस्सा लिया।
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डीलर पॉइंट रजिस्ट्रेशन नीति: क्या है सरकार का नियम?
\r\n\r\nएआरटीओ महेश शर्मा ने बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की 'डीलर पॉइंट रजिस्ट्रेशन' (Dealer Point Registration) नीति पर विस्तार से चर्चा की। यह नीति ग्राहकों की सुविधा के लिए बनाई गई है, ताकि उन्हें वाहन खरीदने के बाद पंजीकरण के लिए आरटीओ (RTO) कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
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इस व्यवस्था के तहत सरकार ने वाहन डीलरों को ही यह अधिकार और जिम्मेदारी दी है कि वे शो-रूम से वाहन की बिक्री के साथ ही उसका ऑनलाइन पंजीकरण (Online Registration) सुनिश्चित करें। लेकिन, परिवहन विभाग के संज्ञान में यह बात आ रही थी कि कुछ डीलर इस नीति का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि आम जनता को भी भविष्य में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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एआरटीओ के 4 सबसे सख्त निर्देश
\r\n\r\nबैठक में एआरटीओ ने डीलरों को बिल्कुल स्पष्ट और दो-टूक शब्दों में हिदायत दी। उनके द्वारा जारी किए गए मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं:
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1. बिना पंजीकरण के नहीं होगी वाहन की डिलीवरी सबसे बड़ा और कड़ा निर्देश यह है कि कोई भी डीलर किसी भी ग्राहक को तब तक वाहन की चाबी नहीं सौंपेगा, जब तक कि उस वाहन का विधिवत पंजीकरण न हो जाए। अक्सर लोग 'अप्लाइड फॉर' (Applied For) का स्टिकर लगाकर महीनों तक गाड़ियां चलाते हैं। एआरटीओ ने साफ किया कि अब ऐसा करना पूरी तरह से गैर-कानूनी माना जाएगा।
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2. ऑनलाइन आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण वाहनों की बिक्री के तुरंत बाद उनके पंजीकरण से जुड़े ऑनलाइन आवेदन बिना किसी देरी के परिवहन कार्यालय के पोर्टल पर भेजे जाने चाहिए। फाइलों को शो-रूम में अटका कर रखने की प्रवृत्ति को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समय पर डाटा सिंक न होने से आरटीओ के कामकाज में भी बाधा उत्पन्न होती है।
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3. डाटा फीडिंग के लिए योग्य कर्मचारियों की नियुक्ति अक्सर देखा जाता है कि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में ग्राहक का नाम, पता या वाहन के चेसिस/इंजन नंबर में गलतियां हो जाती हैं। बाद में इन गलतियों को सुधारने के लिए ग्राहकों को आरटीओ के धक्के खाने पड़ते हैं। महेश शर्मा ने निर्देश दिया कि डीलर पॉइंट पर डाटा फीडिंग और दस्तावेज़ों की जांच का कार्य केवल प्रशिक्षित और योग्य व्यक्तियों (Qualified Personnel) द्वारा ही किया जाए, ताकि मानवीय भूल (Human Error) की कोई गुंजाइश न बचे।
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4. मोटर वाहन अधिनियम का पूर्ण पालन प्रत्येक डीलर को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे जो भी व्यवसाय कर रहे हैं, वह मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के शत-प्रतिशत अनुरूप हो।
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नियमों की अनदेखी का क्या होगा परिणाम?
\r\n\r\nइस बैठक को केवल एक सामान्य चर्चा तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे एक चेतावनी के रूप में प्रस्तुत किया गया। यदि कोई डीलर इन नियमों की अनदेखी करता पाया गया, तो उसके खिलाफ निम्नलिखित कार्रवाई हो सकती है:
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| \r\n उल्लंघन का प्रकार \r\n | \r\n \r\n संभावित विभागीय कार्रवाई \r\n | \r\n
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| \r\n बिना रजिस्ट्रेशन वाहन सौंपना \r\n | \r\n \r\n डीलर का ट्रेड सर्टिफिकेट (Trade Certificate) निलंबित या रद्द किया जा सकता है। \r\n | \r\n
| \r\n डाटा फीडिंग में बार-बार गलती \r\n | \r\n \r\n डीलर पोर्टल का एक्सेस ब्लॉक किया जा सकता है और भारी जुर्माना लग सकता है। \r\n | \r\n
| \r\n दस्तावेजों में हेराफेरी \r\n | \r\n \r\n मोटर वाहन अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत कानूनी मुकदमा (FIR)। \r\n | \r\n
आम जनता के लिए इस फैसले के क्या मायने हैं?
\r\n\r\nबिजनौर परिवहन विभाग का यह कदम सीधे तौर पर आम जनता के हितों की रक्षा करता है।
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- \r\n कानूनी सुरक्षा: बिना रजिस्ट्रेशन के वाहन चलाना अपराध है। यदि ऐसी गाड़ी से कोई दुर्घटना हो जाती है, तो बीमा कंपनी क्लेम (Insurance Claim) देने से साफ इनकार कर सकती है। डीलरों पर सख्ती से ग्राहकों को कानूनी पचड़ों से बचाया जा सकेगा।\r\n \r\n
- \r\n अपराध पर लगाम: बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों का इस्तेमाल अक्सर आपराधिक गतिविधियों में किया जाता है। शो-रूम से ही नंबर अलॉट होने के बाद वाहनों की ट्रैकिंग आसान हो जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n RC की गलतियों से छुटकारा: योग्य कर्मचारियों द्वारा डाटा फीडिंग से आम लोगों के नाम और पते में होने वाली स्पेलिंग मिस्टेक की समस्या खत्म होगी, जिससे भविष्य में वाहन ट्रांसफर या बेचने में कोई रुकावट नहीं आएगी।\r\n \r\n
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प्रशासन की दूरगामी सोच
\r\n\r\nएआरटीओ महेश शर्मा का यह कदम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बिजनौर प्रशासन यातायात नियमों और विभागीय नीतियों को लेकर जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति अपना रहा है। डीलरों को दी गई यह चेतावनी केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि सिस्टम को पारदर्शी और जन-हितैषी बनाने की एक बड़ी पहल है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनपद के ऑटोमोबाइल डीलर इन आदेशों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और धरातल पर इनका कितना प्रभावी क्रियान्वयन होता है। परिवहन कार्यालय आने वाले हफ्तों में औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) के जरिए इन आदेशों के पालन की समीक्षा भी कर सकता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.