बिजनौर (Bijnor): उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कर चोरी (Tax Evasion) के खिलाफ चलाए जा रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत बिजनौर पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। जनपद की शेरकोट थाना पुलिस (Sherkot Police Station) ने राज्य कर विभाग (State Tax Department) के सहयोग से जीएसटी चोरी के एक मामले में वांछित चल रहे एक शातिर अभियुक्त को गिरफ्तार किया है।READ ALSO:-बिजनौर: धामपुर पुलिस का 'डबल धमाका' - टाइल्स शोरूम और घर में चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार; भारी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर बरामद
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यह मामला केवल कर चोरी का नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अस्तित्वहीन फर्मों (Non-existent firms) का संचालन कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का है। गिरफ्तार अभियुक्त ने कागजों में एक फर्म दिखाकर लाखों का वारा-न्यारा करने की कोशिश की थी। 14 फरवरी 2026 को हुई इस गिरफ्तारी ने जिले में फर्जी बिलिंग करने वालों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
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\r\n— Bijnor Police (@bijnorpolice) February 14, 2026
\r\nथाना शेरकोट पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 198/25 धारा 318(4)/ 336(3)/338/340(2)/61(2) बीएनएस मे वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। #UPPolice pic.twitter.com/7YECrMPZpH
क्या है पूरा मामला? (The Case Details)
\r\n\r\nपुलिस सूत्रों और एफआईआर (FIR) के मुताबिक, यह मामला राज्य कर विभाग की सतर्कता से सामने आया। राज्य कर अधिकारी (State Tax Officer), खण्ड धामपुर, श्री संदीप कुमार वर्मा ने शेरकोट थाने में एक लिखित तहरीर दी थी।
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तहरीर में बताया गया था कि 'सर्वश्री K K ENTERPRISES' (के.के. एंटरप्राइजेज) नामक एक फर्म पंजीकृत कराई गई थी। कागजों में इस फर्म के स्वामी का नाम कपिल कुमार दर्शाया गया था। जब कर विभाग के अधिकारियों ने इस फर्म के कामकाज और लेन-देन की जांच की, तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं:
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- \r\n कागजी व्यापार: फर्म द्वारा दिखाए गए व्यापारिक लेन-देन (Transactions) केवल कागजों तक सीमित थे।\r\n \r\n
- \r\n कोई वास्तविक गतिविधि नहीं: जमीनी स्तर पर फर्म द्वारा माल की कोई वास्तविक खरीद-फरोख्त (Actual Supply of Goods) नहीं की जा रही थी।\r\n \r\n
- \r\n जीएसटी चोरी: बिना माल की आपूर्ति किए केवल बिल जारी करके इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाने या पास करने का खेल चल रहा था, जो सीधे तौर पर जीएसटी कानून का उल्लंघन और चोरी है।\r\n \r\n
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इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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अभियुक्त की गिरफ्तारी और पहचान
\r\n\r\nशेरकोट पुलिस ने मुखबिर की सूचना और सर्विलांस की मदद से इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अभियुक्त को 14 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर लिया।
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- \r\n गिरफ्तार अभियुक्त: आनन्द कुमार (Anand Kumar)\r\n \r\n
- \r\n पिता का नाम: राकेश कुमार\r\n \r\n
- \r\n निवासी: फूलबाग कॉलोनी, शुगर मिल रोड, थाना धामपुर, जनपद बिजनौर।\r\n \r\n
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जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी या तो आनंद कुमार ही है जो किसी और के नाम का इस्तेमाल कर रहा था, या फिर वह इस सिंडिकेट का अहम हिस्सा है। पुलिस अब इसकी गहराई से जांच कर रही है कि क्या 'कपिल कुमार' कोई वास्तविक व्यक्ति है या यह एक फर्जी पहचान थी जिसे आनंद कुमार इस्तेमाल कर रहा था।
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बरामदगी: मोबाइल और दस्तावेजों का जखीरा
\r\n\r\nगिरफ्तारी के समय पुलिस ने आनंद कुमार की तलाशी ली, जिसमें उसके पास से कई महत्वपूर्ण वस्तुएं बरामद हुईं जो इस अपराध में उसकी संलिप्तता को साबित करती हैं:
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- \r\n मोबाइल फोन (2 नग):\r\n\r\n
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- \r\n एक सैमसंग ए55 (हल्का नीला रंग) - संभवतः ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और ई-वे बिल जनरेट करने के लिए इस्तेमाल होता था।\r\n \r\n
- \r\n एक आईटेल कंपनी का कीपैड मोबाइल।\r\n \r\n
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- \r\n आधार कार्ड (2 नग):\r\n\r\n
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- \r\n एक स्वयं अभियुक्त आनंद कुमार का।\r\n \r\n
- \r\n दूसरा उसकी पत्नी स्वाति रानी का।\r\n \r\n
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- \r\n पैन कार्ड (2 नग):\r\n\r\n
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- \r\n एक आनंद कुमार का।\r\n \r\n
- \r\n दूसरा उसकी पत्नी स्वाति रानी का।\r\n \r\n
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पत्नी के दस्तावेजों की बरामदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि अभियुक्त संभवतः अपने परिवार के सदस्यों के दस्तावेजों का उपयोग करके भी फर्जी फर्में (Shell Firms) बनाने या संचालित करने की फिराक में था। पुलिस अब स्वाति रानी के नाम पर दर्ज संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच कर सकती है।
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भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई
\r\n\r\nचूंकि यह मामला 2026 का है, इसलिए पुलिस ने पुराने आईपीसी (IPC) की जगह नई भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) के तहत मामला दर्ज किया है। अभियुक्त आनंद कुमार के विरुद्ध थाना शेरकोट पर मुकदमा अपराध संख्या 198/2025 पहले से पंजीकृत था।
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उस पर लगाई गई धाराएं इस प्रकार हैं:
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- \r\n धारा 318(4) BNS: धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति का परिदान (Cheating)।\r\n \r\n
- \r\n धारा 336(3) BNS: कूटरचित दस्तावेज बनाना (Forgery)।\r\n \r\n
- \r\n धारा 338 BNS: जाली दस्तावेज का असली के रूप में उपयोग करना।\r\n \r\n
- \r\n धारा 340(2) BNS: खातों में हेराफेरी।\r\n \r\n
- \r\n धारा 61(2) BNS: आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy)।\r\n \r\n
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ये धाराएं अपने आप में बेहद गंभीर हैं और इनमें सख्त सजा का प्रावधान है।
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जीएसटी चोरी: अर्थव्यवस्था के लिए खतरा
\r\n\r\nबिजनौर के शेरकोट में पकड़ा गया यह मामला कोई अकेला मामला नहीं है। 'बोगस बिलिंग' (Bogus Billing) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नासूर बन गया है। अपराधी बिना माल बेचे केवल इनवॉइस जारी करते हैं और सरकार से रिफंड क्लेम करते हैं या अपनी टैक्स देनदारी कम करते हैं।
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धामपुर के राज्य कर अधिकारी श्री संदीप कुमार वर्मा की सतर्कता से यह मामला पकड़ में आया। अधिकारियों का कहना है कि वे अब डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics) का उपयोग कर रहे हैं। अगर कोई फर्म अपनी क्षमता से अधिक कारोबार दिखाती है या बिना ई-वे बिल के माल ढुलाई का दावा करती है, तो वह तुरंत रडार पर आ जाती है।
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पुलिस की आगे की कार्रवाई
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- \r\n इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं?\r\n \r\n
- \r\n क्या 'के.के. एंटरप्राइजेज' के अलावा भी कोई और फर्जी फर्म इनके द्वारा संचालित की जा रही है?\r\n \r\n
- \r\n आनंद कुमार ने अब तक सरकार को कुल कितने राजस्व का नुकसान पहुंचाया है?\r\n \r\n
- \r\n पत्नी के दस्तावेजों का उपयोग किस हद तक किया गया है?\r\n \r\n
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नागरिकों के लिए सलाह
\r\n\r\nबिजनौर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आधार और पैन कार्ड जैसे संवेदनशील दस्तावेज किसी भी व्यक्ति को न दें। अक्सर जालसाज नौकरी या लोन दिलाने के बहाने दस्तावेज ले लेते हैं और आपके नाम पर फर्जी फर्म खोलकर जीएसटी चोरी करते हैं। जब विभाग की नोटिस आती है, तब आम आदमी को पता चलता है कि वह ठगी का शिकार हो चुका है।
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शेरकोट पुलिस द्वारा आनंद कुमार की गिरफ्तारी कर विभाग और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम है। 'के.के. एंटरप्राइजेज' जैसी फर्जी फर्मों का भंडाफोड़ होना यह सुनिश्चित करता है कि सरकार को मिलने वाला राजस्व सुरक्षित रहे। उम्मीद है कि पुलिस की पूछताछ में इस सिंडिकेट के और भी कई राज खुलेंगे।
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बिजनौर जनपद की शेरकोट पुलिस ने 14 फरवरी 2026 को जीएसटी चोरी के एक मामले में धामपुर निवासी आनंद कुमार को गिरफ्तार किया है। राज्य कर अधिकारी की शिकायत पर दर्ज मुकदमे के अनुसार, 'के.के. एंटरप्राइजेज' नामक फर्म केवल कागजों पर चलाई जा रही थी और वास्तविक व्यापार के बिना जीएसटी चोरी की जा रही थी। पुलिस ने अभियुक्त के पास से दो मोबाइल, और अपनी व पत्नी के आधार-पैन कार्ड बरामद किए हैं। अभियुक्त के खिलाफ बीएनएस (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
Sabse pehle comment karne wale banein.