मेरठ: मेरठ शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले भैसाली बस अड्डे (Bhaisali Bus Stand) के बाहर शनिवार की सुबह एक ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप दी। मेरठ भैसाली बस अड्डा हादसा एक बार फिर परिवहन विभाग की लापरवाही और अनियंत्रित होती यातायात व्यवस्था की पोल खोल गया है। सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस व्यस्त इलाके में वैशाली डिपो की एक अनुबंधित (Contracted) बस ने सड़क किनारे वाहन का इंतजार कर रहे एक किसान को बुरी तरह कुचल दिया।READ ALSO:-नूरपुर-मुरादाबाद हाईवे पर मौत का सन्नाटा: देहरादून से लौट रहे युवक की घर की चौखट तक पहुँचने से पहले ही दर्दनाक मौत
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हादसा इतना भीषण था कि बस चालक युवक को टक्कर मारने के बाद लगभग 10 मीटर तक सड़क पर घसीटता हुआ ले गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में पल्लवपुरम निवासी 37 वर्षीय किसान नितिन कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी चालक संवेदनहीनता की हदें पार करते हुए बस को वहीं छोड़कर फरार हो गया।
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हादसे का आँखों देखा हाल: शनिवार की सुबह कैसे मातम में बदली?

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प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, घटना शनिवार सुबह की है। पल्लवपुरम थाना क्षेत्र के धंजू गांव के रहने वाले नितिन कुमार (पुत्र वेदप्रकाश) शुक्रवार को किसी निजी कार्य से मेरठ आए थे। शनिवार सुबह काम खत्म करके वह वापस अपने गांव लौटने के लिए भैसाली बस अड्डे के बाहर खड़े होकर किसी वाहन का इंतजार कर रहे थे।
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इसी दौरान वैशाली डिपो की एक अनुबंधित बस सवारियों को भरकर अड्डे से बाहर निकल रही थी। चश्मदीदों का कहना है कि चालक बस को बेहद लापरवाही और तेज गति से चला रहा था। जैसे ही बस निकास द्वार से बाहर सड़क पर आई, चालक ने नियंत्रण खो दिया और सड़क किनारे खड़े नितिन को जोरदार टक्कर मार दी।
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टक्कर लगते ही नितिन बस के नीचे फंस गए, लेकिन चालक ने बस रोकने के बजाय उसे आगे बढ़ाने की कोशिश की, जिससे नितिन लगभग 10 मीटर तक बस के साथ घिसटते चले गए। वहां मौजूद राहगीरों और अन्य वाहन चालकों ने जब शोर मचाया और बस को घेरने की कोशिश की, तब जाकर चालक ने ब्रेक लगाए।
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लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नितिन का शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुका था और उनकी सांसें थम चुकी थीं। भीड़ को अपनी तरफ आता देख आरोपी चालक बस का गेट खोलकर भीड़ का फायदा उठाते हुए मौके से फरार हो गया।
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पुलिस कार्रवाई और मौके पर हंगामा

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दिनदहाड़े हुए इस मेरठ भैसाली बस अड्डा हादसा के कारण वहां अफरा-तफरी मच गई। बस अड्डे के बाहर मुख्य मार्ग पर लंबा जाम लग गया। सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस और सीओ कैंट नवीना शुक्ला मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने सबसे पहले आक्रोशित भीड़ को शांत कराया और यातायात व्यवस्था को सुचारू किया।
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शव की स्थिति इतनी भयावह थी कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। पुलिस ने तुरंत नितिन के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया। नितिन की जेब से मिले मोबाइल फोन और दस्तावेजों के आधार पर उनकी शिनाख्त हुई, जिसके बाद पुलिस ने उनके परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दी।
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सीओ कैंट का बयान:

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"घटना बेहद दुखद है। मृतक की पहचान नितिन कुमार निवासी धंजू गांव के रूप में हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों की तहरीर के आधार पर आरोपी बस चालक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। बस को जब्त कर लिया गया है और फरार चालक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो टीमें लगाई गई हैं। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।" — नवीना शुक्ला, सीओ कैंट, मेरठ।
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उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार: दो बेटियों ने खोया पिता

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नितिन कुमार एक साधारण किसान थे और खेती-किसानी करके ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी उम्र महज 37 वर्ष थी। परिवार वालों के अनुसार, करीब आठ साल पहले नितिन की शादी अर्चना से हुई थी। उनका वैवाहिक जीवन बहुत खुशहाल था और उनकी दो छोटी बेटियां हैं।
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नितिन अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर बहुत सपने देखते थे, लेकिन एक तेज रफ्तार बस ने उन सपनों को हमेशा के लिए कुचल दिया। जैसे ही पुलिस ने फोन पर नितिन की मौत की खबर दी, धंजू गांव स्थित उनके घर में कोहराम मच गया। पत्नी अर्चना का रो-रोकर बुरा हाल है और वह बार-बार बेहोश हो रही हैं। मासूम बेटियों को अभी यह भी समझ नहीं आ रहा है कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
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परिजन बदहवास हालत में रोते-बिलखते हुए पोस्टमार्टम हाउस और थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आरोपी चालक को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि किसी और का परिवार इस तरह न उजड़े।
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अनुबंधित बसों की रफ्तार: यात्रियों के लिए जानलेवा?

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यह मेरठ भैसाली बस अड्डा हादसा कोई पहली घटना नहीं है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) के बेड़े में शामिल अनुबंधित बसें अक्सर हादसों का कारण बनती हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये बस चालक अधिक से अधिक सवारियां भरने और जल्दी फेरे लगाने के चक्कर में यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं।
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भैसाली बस अड्डे पर अव्यवस्था के मुख्य कारण:

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    अंधाधुंध रफ्तार: डिपो से बाहर निकलते ही चालक बसों की गति बढ़ा देते हैं, जबकि वहां भारी भीड़भाड़ रहती है।
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    अवैध पार्किंग: बस अड्डे के बाहर ऑटो और ई-रिक्शा की अवैध पार्किंग के कारण सड़क संकरी हो जाती है, जिससे यात्रियों को सड़क पर खड़ा होना पड़ता है।
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    चालकों की लापरवाही: अनुबंधित बसों के चालक अक्सर अपशिक्षित होते हैं या लापरवाही से ड्राइविंग करते हैं। कई बार पुरानी बसों के ब्रेक फेल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
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सड़क सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी

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इस हादसे ने एक बार फिर मेरठ प्रशासन और यातायात पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भैसाली बस अड्डा शहर का सबसे व्यस्त केंद्र है, जहां से दिल्ली, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और हरिद्वार के लिए बसें मिलती हैं। यहां रोजाना हजारों यात्रियों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद, यात्रियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम नदारद हैं।
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हादसे रोकने के लिए क्या कदम जरूरी हैं?

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    सख्त निगरानी: बस अड्डे के निकास द्वार पर पुलिस पिकेट होनी चाहिए जो बसों की गति और चालकों के व्यवहार पर नजर रखे।
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    पैदल यात्रियों के लिए जगह: बस अड्डे के बाहर यात्रियों के खड़े होने के लिए सुरक्षित वेटिंग जोन बनाए जाने चाहिए ताकि वे मुख्य सड़क पर न आएं।
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    चालकों का वेरिफिकेशन: अनुबंधित बसों के चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन और ड्राइविंग टेस्ट सख्ती से होना चाहिए।
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    सीसीटीवी कैमरे: बस अड्डे के आसपास उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
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कानूनी पहलू: हिट एंड रन के नए प्रावधान
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नितिन कुमार की मौत के मामले में पुलिस 'हिट एंड रन' (Hit and Run) और लापरवाही से मौत (Section 106 of BNS) के तहत कार्रवाई कर रही है। नए कानूनों के मुताबिक, अगर कोई चालक दुर्घटना के बाद पुलिस को सूचित किए बिना भाग जाता है, तो उसे सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
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पुलिस का कहना है कि बस को जब्त कर लिया गया है, जिससे मालिक और चालक का पता लगाना आसान होगा। तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चालक की पहचान लगभग तय हो चुकी है और उसकी गिरफ्तारी केवल समय की बात है।
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परिवार को मुआवजे की मांग

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नितिन कुमार अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत से परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। गांव के लोगों और किसान संगठनों ने जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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परिजनों का कहना है कि सरकार को मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी या आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए ताकि दो छोटी बेटियों की परवरिश में कोई बाधा न आए। खेती पर निर्भर परिवार के लिए घर के मुखिया का जाना किसी बड़े पहाड़ के टूटने जैसा है।
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मेरठ भैसाली बस अड्डा हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का परिणाम है। एक किसान, जो अपने काम से घर लौट रहा था, उसे प्रशासन की अव्यवस्था और एक चालक की जल्दबाजी ने मौत के घाट उतार दिया। नितिन कुमार तो चले गए, लेकिन उनके पीछे बिलखता परिवार और दो अनाथ बच्चियां रह गईं।
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अब देखना यह होगा कि मेरठ पुलिस आरोपी चालक को कब तक गिरफ्तार कर पाती है और परिवहन विभाग ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। यह घटना हम सभी के लिए एक सबक है कि सड़क पर चलते समय अत्यंत सावधानी बरतें, क्योंकि कब किसकी लापरवाही भारी पड़ जाए, कहा नहीं जा सकता।
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शनिवार सुबह मेरठ के भैसाली बस अड्डे के बाहर वैशाली डिपो की एक अनुबंधित बस ने पल्लवपुरम निवासी 37 वर्षीय किसान नितिन कुमार को कुचल दिया। चालक ने उन्हें 10 मीटर तक घसीटा, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद चालक बस छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने बस जब्त कर ली है और आरोपी की तलाश जारी है। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटी बेटियों को छोड़ गया है।
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