लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने अवमानना (Contempt of Court) के एक गंभीर मामले में बिजनौर की जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर के खिलाफ जमानती वारंट (Bailable Warrant) जारी किया है। न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने बिजनौर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) को आदेश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि जिलाधिकारी को 5 जनवरी तक न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए।READ ALSO:-बिजनौर में 'एकता' का शंखनाद: नूरपुर में उमड़ा जनसैलाब, सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर सुरेश राणा का हुआ ऐतिहासिक स्वागत
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न्यायालय ने जिलाधिकारी के निर्धारित तिथि पर उपस्थित न होने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। यह कदम न्यायिक आदेशों के अनुपालन में प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही को लेकर कोर्ट की सख्ती को दर्शाता है।
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क्या है अवमानना का कारण?

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न्यायालय के आदेश में स्पष्ट किया गया कि इस अवमानना याचिका में जिलाधिकारी, बिजनौर को नोटिस पहले ही प्राप्त हो गया था। इस मामले की सुनवाई के लिए पिछली तिथि 6 नवंबर निर्धारित की गई थी, जिस पर जिलाधिकारी को न्यायालय में उपस्थित होना आवश्यक था।
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निर्धारित तिथि पर जिलाधिकारी जसजीत कौर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुईं, जिसे न्यायमूर्ति ने अदालत की अवमानना माना और उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।
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जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा है मामला

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यह अवमानना मामला जनपद बिजनौर के धामपुर तहसील अंतर्गत ग्राम कालासागर निवासी विक्रम सिंह पुत्र किशोरी सिंह से संबंधित है।
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    जाति प्रमाण पत्र का विवाद: विक्रम सिंह पर आरोप है कि उन्होंने 27 अगस्त 1973 को तथ्य छिपाकर धनगर जाति का अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र बनवाया था।
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    शिकायत और निरस्तीकरण: विश्व दलित परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र पाल सिंह और अनुसूचित जाति के कुछ संगठनों के पदाधिकारियों ने इसकी शिकायत की थी। शिकायत के बाद, स्कूटनी कमेटी ने जांच की और उक्त जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने का आदेश दिया था।
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    याचिका: विक्रम सिंह ने इस निरस्तीकरण आदेश के विरुद्ध याचिका दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई होनी थी।
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यह मामला जिलाधिकारी के न्यायालय में उपस्थित होने से संबंधित था, और उनकी अनुपस्थिति के कारण ही खंडपीठ ने डीएम जसजीत कौर वारंट जारी किया।
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न्यायालय का सख्त रुख

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किसी प्रशासनिक प्रमुख अधिकारी के खिलाफ अवमानना मामले में वारंट जारी होना एक गंभीर घटना मानी जाती है। यह घटना दर्शाती है कि उच्च न्यायालय न्यायिक प्रक्रिया और आदेशों के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही या अनादर को बर्दाश्त नहीं करेगा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को जारी किया गया आदेश, यह सुनिश्चित करता है कि जिलाधिकारी अगली तारीख पर अनिवार्य रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हों। 
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इस मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी को निर्धारित है, जिस दिन डीएम जसजीत कौर वारंट के तहत कोर्ट में पेश होंगी। 
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने जाति प्रमाण पत्र से जुड़े अवमानना मामले में सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने पर बिजनौर की जिलाधिकारी डीएम जसजीत कौर वारंट जारी कर दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को उन्हें 5 जनवरी तक कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया गया है। यह आदेश प्रशासनिक अधिकारियों को न्यायिक आदेशों के प्रति अधिक जिम्मेदार होने की सख्त चेतावनी देता है।
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