Anil Kumar Sharma, Special Correspondent-धामपुर (एजुकेशन डेस्क / विशेष रिपोर्ट): शिक्षा किसी भी सभ्य समाज की नींव होती है और जो शिक्षण संस्थान दशकों तक निस्वार्थ भाव से शिक्षा की अलख जगाते हैं, वे समाज के लिए किसी मंदिर से कम नहीं होते। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर नगर में पिछले छह दशकों से शिक्षा का प्रकाश फैला रहा प्रतिष्ठित विद्यालय 'शिखर शिशु सदन' (Shikhar Shishu Sadan) शिक्षा जगत में एक ऐसा ही चमकता हुआ नाम है।READ ALSO:-रश्मि आर्या ने रची नई संगीतमय दास्तान: 'शिव शंभू शंकरा' से किया सिंगिंग डेब्यू, आवाज़ में छलकी दिवंगत माँ की यादें और शिव भक्ति
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सोमवार को विद्यालय प्रांगण में एक बेहद खास और ऐतिहासिक दिन देखने को मिला, जब शिखर शिशु सदन ने अपना 62वां वार्षिकोत्सव एवं स्थापना दिवस बड़े ही धूमधाम, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया। इस विशेष अवसर पर विद्यालय की दोनों शाखाओं (Schools) का संयुक्त रूप से एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस महा-आयोजन को तीन अलग-अलग सत्रों (Sessions) में विभाजित किया गया था, जिसमें आध्यात्म, संस्कृति और आधुनिकता का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। आइए, इस शानदार वार्षिकोत्सव के हर एक पहलू को विस्तार से जानते हैं।
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प्रथम सत्र: वैदिक मंत्रोच्चार और हवन से हुई आध्यात्मिक शुरुआत
\r\n\r\nकिसी भी शुभ कार्य की शुरुआत यदि ईश्वर की आराधना और भारतीय संस्कृति के अनुसार हो, तो उसकी सफलता सुनिश्चित हो जाती है। शिखर शिशु सदन के वार्षिकोत्सव का प्रथम सत्र पूरी तरह से भारतीय मूल्यों और आध्यात्म को समर्पित रहा।
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कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिसर में विद्वान पंडितों द्वारा सस्वर धार्मिक मंत्रोच्चार (Vedic Mantras) के साथ हुई। विद्यालय की गरिमा, सुख-शांति और उत्तरोत्तर प्रगति की कामना करते हुए एक विशाल हवन (Havan) का आयोजन किया गया। हवन कुंड से उठने वाली पवित्र धुएं और मंत्रों की गूंज ने पूरे विद्यालय परिसर के वातावरण को पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
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हवन में मौजूद रहे प्रमुख गणमान्य व्यक्ति: इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान की भूमिका विद्यालय के कर्मठ प्रबंधक बाबू नरेंद्र कुमार गुप्ता और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मधुश्री गुप्ता ने निभाई। उन्होंने पूर्ण विधि-विधान के साथ हवन कुंड में आहुतियां दीं।
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उनके साथ इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में विद्यालय के संरक्षक सुधीर अग्रवाल, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता, विद्यालय के डायरेक्टर डॉ. शेखर अवस्थी, उप-प्रधानाचार्य देवेश गहलोत, तथा दोनों विद्यालयों की प्रधानाचार्याएं— भारती सिंह और पलक मित्तल ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और हवन में पूर्ण आहुति देकर प्रथम सत्र को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
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द्वितीय सत्र: छात्र-छात्राओं की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
\r\n\r\nहवन-पूजन के बाद कार्यक्रम का दूसरा सत्र शुरू हुआ, जो पूरी तरह से विद्यालय के बच्चों की छिपी हुई प्रतिभाओं, कला और संस्कृति को समर्पित था। इस सत्र में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न प्रकार के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम (Cultural Programs) प्रस्तुत किए।
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- \r\n नृत्य और नाटिकाएं: बच्चों ने रंग-बिरंगी वेशभूषा में देशभक्ति गीतों, लोक नृत्यों और सामाजिक संदेश देने वाली लघु नाटिकाओं की शानदार प्रस्तुति दी।\r\n \r\n
- \r\n अद्भुत भाव-भंगिमाएं: नन्हे-मुन्ने बच्चों से लेकर बड़े छात्रों तक ने अपनी बेहतरीन भाव-भंगिमाओं (Expressions) और गजब के आत्मविश्वास से वहां मौजूद सभी शिक्षकों, अतिथियों और अभिभावकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा प्रांगण गूंज उठता था।\r\n \r\n
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प्रधानाचार्या भारती सिंह ने पेश किया 62 वर्षों का गौरवशाली इतिहास: इस सांस्कृतिक माहौल के बीच, विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती भारती सिंह ने मंच साझा किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह के सामने पिछले 62 वर्षों में विद्यालय द्वारा की गई शिक्षा की अनवरत सेवा और विकास यात्रा का विस्तृत विवरण (Annual Report) प्रस्तुत किया।
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\r\n\r\n\r\nउन्होंने बताया कि, "आज से 62 वर्ष पूर्व जिस छोटे से पौधे को शिक्षा के उद्देश्य से रोपा गया था, आज वह एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। इन छह दशकों में शिखर शिशु सदन से पढ़कर निकले अनगिनत छात्रों ने डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी बनकर न केवल धामपुर का, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। यह विद्यालय केवल अक्षर ज्ञान नहीं देता, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास (All-round Development) पर जोर देता है।"\r\n
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तृतीय सत्र: 'डिजिटल इंडिया' की ओर कदम, विद्यालय को मिले स्मार्ट क्लासरूम
\r\n\r\nसमय के साथ शिक्षा के तरीकों में भी भारी बदलाव आया है। आज का युग तकनीक (Technology) का युग है, और शिखर शिशु सदन ने यह साबित कर दिया है कि वह आधुनिकता को अपनाने में किसी से पीछे नहीं है।
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कार्यक्रम के तृतीय और समापन सत्र में एक ऐसा कदम उठाया गया, जो विद्यालय के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा। प्रबंधन की ओर से दोनों स्कूलों के छात्रों और शिक्षकों को 'डिजिटल क्लासरूम' (Digital Classrooms) का शानदार और बहुमूल्य उपहार दिया गया।
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फीता काटकर हुआ उद्घाटन: इन अत्याधुनिक डिजिटल क्लासरूम्स का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि और यजमान श्रीमती मधुश्री गुप्ता के कर-कमलों द्वारा फीता काटकर (Ribbon Cutting) किया गया।
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क्या है डिजिटल क्लासरूम के फायदे?
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- \r\n अब छात्र स्मार्ट बोर्ड्स (Smart Boards), प्रोजेक्टर्स और विज़ुअल एड्स (Visual Aids) के माध्यम से अपनी पढ़ाई करेंगे।\r\n \r\n
- \r\n कठिन विषयों जैसे विज्ञान (Science) और गणित (Mathematics) को 3D एनिमेशन और वीडियो के जरिए समझना अब बच्चों के लिए बेहद आसान और रोचक हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n यह पहल छात्रों को 'डिजिटल इंडिया' (Digital India) के सपने से जोड़ेगी और उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करेगी।\r\n \r\n
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प्रबंधक नरेंद्र कुमार गुप्ता का प्रेरणादायक संबोधन
\r\n\r\nकार्यक्रम के अंतिम पड़ाव में विद्यालय के प्रबंधक बाबू नरेंद्र कुमार गुप्ता ने मंच से सभी को संबोधित किया। उनका यह संबोधन बेहद प्रेरणादायक और ऊर्जा से भरपूर था।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\nउन्होंने कहा, "62 वर्षों का यह लंबा सफर हमारे शिक्षकों की कड़ी मेहनत, अभिभावकों के अटूट विश्वास और छात्रों की लगन का परिणाम है। हमने हमेशा यह प्रयास किया है कि धामपुर के बच्चों को महानगरों के स्तर की शिक्षा यहीं उपलब्ध हो सके। डिजिटल क्लासरूम इसी दिशा में उठाया गया हमारा एक महत्वपूर्ण कदम है। मुझे अपने विद्यालय के समस्त स्टाफ और बच्चों पर गर्व है।"\r\n
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अंत में, उन्होंने विद्यालय के सभी बच्चों, शिक्षकों और नॉन-टीचिंग स्टाफ को स्थापना दिवस (Foundation Day) की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ और सभी अतिथियों और छात्रों को मिष्ठान वितरित किया गया।
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शिखर शिशु सदन का यह 62वां वार्षिकोत्सव केवल एक उत्सव नहीं था, बल्कि यह एक संकल्प था— अपनी गौरवशाली परंपराओं को सहेजते हुए आधुनिकता की ओर बढ़ने का संकल्प। डिजिटल क्लासरूम की स्थापना यह दर्शाती है कि विद्यालय प्रबंधन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कितना गंभीर है। खबरीलाल एजुकेशन डेस्क की ओर से शिखर शिशु सदन के समस्त परिवार को उनके 62वें स्थापना दिवस पर ढेरों बधाइयां और सुनहरे भविष्य के लिए अनगिनत शुभकामनाएं!
Sabse pehle comment karne wale banein.